Chaibasa News : निर्मल मन वालों को ही मिलते हैं प्रभु : जीतू दास

चक्रधरपुर के पोड़ाहाट स्टेडियम में आयोजित श्रीमद् भागवत के चौथे दिन ओडिशा से आये महाराज जीतू दास ने भक्तिभाव और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर प्रवचन दिये.

चक्रधरपुर.

चक्रधरपुर के पोड़ाहाट स्टेडियम में आयोजित श्रीमद् भागवत के चौथे दिन ओडिशा से आये महाराज जीतू दास ने भक्तिभाव और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर प्रवचन दिये. उन्होंने बताया कि जब जीव में ईश्वर प्रेम का भाव उत्पन्न होता है, तो उसमें प्रभु की लगन बन जाती है और भगवान केवल भक्त के भाव को ही स्वीकार करते हैं. भक्ति की छोटी-बड़ी कोई सीमा नहीं होती है.

महाराज ने कहा कि मन को निर्मल रखना आवश्यक है, क्योंकि ईश्वर उसी हृदय में निवास करते हैं जो पवित्र होता है. कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव से जुड़े प्रसंगों जैसे कि देवकी-वासुदेव के घर जन्म, जेल के बंदन तोड़ना, यमुना पार करवाना और नंदबाबा के घर पहुंचाना का सुंदर वर्णन किया गया. उन्होंने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती त्रस्त हो गयी थी, तब धर्म की स्थापना हेतु श्रीकृष्ण ने अवतार लिया. माखन चोरी की कथा में महाराज जी ने “माखन” शब्द का अर्थ बताते हुए समझाया कि ‘माख’ अर्थात क्रोध और ‘न’ अर्थात नहीं. यानी जो क्रोध आदि विकारों से रहित है. वहीं भगवान को प्रिय है. उन्होंने कहा कि जब भक्त संकट में होता है तो भगवान स्वयं किसी न किसी रूप में उसकी सहायता करने आते हैं. कथा के अंत में महाआरती और प्रसाद वितरण हुआ. भक्तगण भजनों की संगीतमय धुनों पर झूमते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.

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