चंपुआ प्रखंड के रंगामटिया प्राथमिक आवासीय विद्यालय में सुविधाओं का अभाव है. आधारभूत संरचना की भारी कमी के कारण एक ही कमरे में चार अलग-अलग कक्षाओं के 50 से अधिक छात्र एक साथ पढ़ने को विवश हैं. यह स्थिति बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. यहां शिक्षक भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण ठीक से पढ़ा नहीं पाते हैं. वहीं हॉस्टल में सुविधा नहीं रहने के कारण 40 विद्यार्थी दो कमरों में जैसे-तैसे रह रहे हैं.
स्टोर रूम जर्जर, किताब रखने में परेशानी :
इतना ही नहीं, जरूरी बिल्डिंग न होने की वजह से, स्टोर रूम जहां स्कूल की किताबें और अकाउंट्स रखे जाते हैं. उसकी हालत भी जर्जर है. स्कूल का किचन रूम भी जर्जर है. बच्चों के लिए खाने के समय दरी की जगह प्लास्टिक बिछायी जाती है. जबकि 40 विद्यार्थियों के लिए बने सिर्फ दो टूटे-फूटे कमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. हर कमरों में 20 विद्यार्थी जैसे-तैसे रह रहे हैं. यह कमरा काफी खतरनाक है. अभिभावकों ने इसकी शिकायत भी की है, पर कोई पहल नहीं की जा रही है. इतना ही नहीं स्कूल कैंपस में सांपों का डर बना रहता है. अभिभावकों ने टूटे शौचालय के साथ स्कूल कैंपस की गंदगी और असुरक्षित हालत पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. दूसरी ओर चंपुआ आइटीडीए प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेटर रामकृष्ण गौड़ ने इस संदर्भ में कहा कि हॉस्टल की स्थिति सुधर जायेगी.
शिक्षा विभाग नहीं दे रहा ध्यान
सरकार आदिवासी विद्यार्थियों के विकास के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, पर चंपुआ प्रखंड में अपवाद देखने को मिला है. जरूरी संसाधन नहीं रहने की वजह से हॉस्टल में रहने वाले बच्चे जैसे-तैसे रह रहे हैं. इस पर ना तो शिक्षा विभाग और ना ही आदिवासी विकास एजेंसी इस पर ध्यान दे रही है. ऐसे में अभिभावक नाखुश हैं. जानकारी के अनुसार चंपुआ प्रखंड के रंगामटिया प्राइमरी आवासीय स्कूल में नर्सरी से सातवीं क्लास के 83 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जबकि यहां के हॉस्टल में 40 स्टूडेंट रह रहे हैं. स्कूल में कमरों की कमी की वजह से नर्सरी से तीसरी क्लास तक के बच्चे एक ही क्लास में पढ़ रहे हैं.
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