जैंतगढ़: पश्चिमी सिंहभूम जिले के जैंतगढ़ का ऐतिहासिक डाकबंगला इन दिनों बदहाली का शिकार है. कभी क्षेत्र की शान और प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा यह सरकारी भवन अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. उचित रख-रखाव और प्रशासनिक निगरानी के अभाव में भवन की हालत लगातार खराब हो रही है. परिसर में उगी कंटीली झाड़ियों के बीच असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है.
छत का प्लास्टर टूट रहा, दीवारों में पड़ी दरारें
स्थानीय लोगों के अनुसार, डाकबंगले की छत का प्लास्टर जगह-जगह टूटकर गिर रहा है. भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गयी हैं. बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है, जिससे भवन को और नुकसान पहुंच रहा है. सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण चोर खिड़कियां, दरवाजे और यहां तक कि चौखट भी उखाड़ ले गये हैं. परिसर में झाड़ियों के कारण जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है.
कभी अधिकारियों और चुनाव कर्मियों का था ठिकाना
बताया जाता है कि यह डाकबंगला कभी जिला मुख्यालय चाईबासा सहित दूसरे राज्यों से आने वाले वरिष्ठ अधिकारियों, राजनेताओं और चुनाव कर्मियों के ठहरने का प्रमुख स्थल हुआ करता था. क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण सरकारी बैठकें भी इसी परिसर में होती थीं. समय के साथ प्रशासनिक उपयोग कम हुआ और देखरेख के अभाव में ऐतिहासिक भवन उपेक्षित होता चला गया.
पुराने डाकबंगलों की मरम्मत, जैंतगढ़ की अनदेखी
जैंतगढ़ प्रखंड नवनिर्माण संघर्ष समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी क्षेत्र की उपेक्षा जारी है. ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर गोड्डा और सिमडेगा समेत अन्य जिलों में पुराने डाकबंगलों की मरम्मत से संबंधित टेंडर जारी होने की बात सामने आयी है. वहीं, जैंतगढ़ डाकबंगले के जीर्णोद्धार की योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है.
सीमांकन कर जल्द जीर्णोद्धार की मांग, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भवन निर्माण विभाग व जिला प्रशासन से डाकबंगले के परिसर का सीमांकन कराने तथा जीर्णोद्धार के लिए तत्काल राशि स्वीकृत करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक भवन को बचाने के लिए समय रहते पहल जरूरी है. कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीण चाईबासा मुख्यालय पहुंचकर उपायुक्त को स्मार-पत्र सौंपेंगे. इसके बाद आंदोलन शुरू करने की भी चेतावनी दी गयी है.
