दो हफ्ते गांव-गांव घूमीं अमेरिकी रिसर्चर, कोल्हान की संस्कृति ने किया प्रभावित

अमेरिकी पीएचडी शोधार्थी आकांक्षा कुमारी को कोल्हान की संस्कृति, परंपराओं और जीवन दर्शन पर उनके शोध के लिए सम्मानित किया गया. उन्होंने कोल्हान की माटी की संस्कृति को जीवंत बताया.

हो कला संगम संस्था में रविवार को अमेरिका लौटने से पूर्व कर्नाटक मूल की अमेरिकी पीएचडी शोधार्थी आकांक्षा कुमारी को साहित्यिक पुस्तिका देकर सम्मानित किया गया. हो भाषा साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली ने उन्हें ‘कोरं 1.0’ और ‘कोल्हान में हो राजभाषा की दावेदारी’ की अंग्रेजी अनुवादित पुस्तिका प्रदान की.

आकांक्षा ने कहा कि कोल्हान की माटी में संस्कृति आज भी जीवंत है. यहां का जीवन दर्शन और परंपराएं अद्भुत और आध्यात्मिक हैं. उन्होंने सहयोग के लिए डोबरो बुड़ीउली का आभार जताया.

आकांक्षा अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में पीएचडी शोधार्थी हैं. वह दो सप्ताह से अधिक समय तक चाईबासा में रहीं. इस दौरान उन्होंने कई गांवों का दौरा किया और कोल्हान की संस्कृति, परंपरा और जीवन दर्शन को करीब से देखा. उन्होंने इस दौरान कई गतिविधियों को वीडियो में रिकॉर्ड भी किया.

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By सुनील कुमार सिन्हा

सुनील कुमार सिन्हा वर्ष 1998 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें विशेष रूप से रेल एवं अन्य समसामयिक खबरों की रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता प्राप्त है. उन्होंने स्नातक (ग्रेजुएशन) की शिक्षा प्राप्त की है. अपने लंबे अनुभव, निष्पक्ष दृष्टिकोण और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के माध्यम से उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी एक विश्वसनीय पहचान बनाई है.

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