खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Jharkhand Tasar Production: झारखंड में तसर उत्पादन तेजी से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में रोजगार का मजबूत माध्यम बन रहा है. इसी उद्देश्य को लेकर भारत सरकार के केंद्रीय रेशम बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय) की ओर से चाईबासा में “तसर बीज उत्पादन में नवीन प्रगति एवं भावी रणनीतियां: जनजातीय सशक्तिकरण एवं युवा सहभागिता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.
चाईबासा स्थित सहायक उद्योग निदेशक (रेशम) के कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) चाईबासा आदित्य नारायण, सहायक उद्योग निदेशक रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों तथा अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य झारखंड में तसर उत्पादन को बढ़ावा देना और इससे जुड़े किसानों, युवाओं तथा जनजातीय समुदायों को बेहतर तकनीक और रोजगार के अवसरों की जानकारी देना था.
तसर उद्योग से युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएफओ आदित्य नारायण ने कहा कि तसर पालन झारखंड के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि तसर उद्योग से हजारों परिवारों को रोजगार मिल रहा है और यह आजीविका का मजबूत साधन बन चुका है. उन्होंने कहा कि सेरिकल्चर सेक्टर में झारखंड, खासकर कोल्हान क्षेत्र ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. यहां के किसान और युवा बड़ी संख्या में तसर उत्पादन से जुड़ रहे हैं. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे तसर उद्योग से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें.
तसर बीज उत्पादन में नई तकनीकों की जानकारी
कार्यशाला में केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक-डी डॉ. जय प्रकाश पाण्डेय ने स्वागत भाषण देते हुए तसर बीज उत्पादन में हो रही नवीन वैज्ञानिक प्रगति और भविष्य की रणनीतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों और प्रशिक्षण के माध्यम से तसर उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में तसर उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इसे रोजगार के बड़े क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है.
विभागों के समन्वय से बढ़ेगा तसर उद्योग
सहायक उद्योग निदेशक (एडीआई) चाईबासा रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तसर आधारित आजीविका को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि वन विभाग, उद्योग विभाग और तसर से जुड़े संस्थान मिलकर काम करें तो राज्य में तसर उद्योग को और अधिक गति मिल सकती है. इससे ग्रामीण युवाओं और किसानों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
उन्नत उत्पादन तकनीक की जानकारी
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में केंद्रीय रेशम बोर्ड के डॉ. जेपी पाण्डेय तथा बीएसएमटीसी खरसावां के वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने तसर बीज उत्पादन की उन्नत तकनीकों और सफल बीज फसल उत्पादन के प्रमुख पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी. इसके अलावा चाईबासा पीपीसी के पायलट प्रोजेक्ट अधिकारी के. प्रदीप कुमार महतो ने झारखंड में तसर रेशम कीट पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला. वहीं पीपीसी खरसावां के पीपीओ नितीश कुमार ने कोल्हान क्षेत्र की पर्यावरणीय परिस्थितियों और तसर पालन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी.
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98 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इस कार्यशाला का आयोजन सीएसबी-बीटीएसएसओ – बेसिक सीड मल्टीप्लिकेशन एंड बीएसएमटीसी ट्रेनिंग सेंटर, खरसावां के तत्वावधान में किया गया. कार्यक्रम में कुल 98 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इनमें किसान, तसर कीटपालक, शोधकर्ता, पायलट प्रोजेक्ट अधिकारी, वैज्ञानिक, तकनीकी कर्मचारी तथा झारखंड तसर तकनीकी विकास संस्थान के प्राचार्य और विद्यार्थी शामिल थे. कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवाद और अनुभव साझा किए गए. साथ ही उन्हें व्यावहारिक जानकारी देने के लिए क्षेत्र भ्रमण कराया गया और तसर उत्पादन से जुड़ी तकनीकों का डेमोस्ट्रेशन भी दिखाया गया, जिससे प्रतिभागियों को इस क्षेत्र में रोजगार और उत्पादन की बेहतर संभावनाओं को समझने का अवसर मिला.
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