चाईबासा.
खूंटपानी के ऐतिहासिक तीर्थ मेला सह महोत्सव की 152वीं वर्षगांठ की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. 8 नवंबर को सुबह से ही धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं का जुटान शुरू हो जायेगा. महोत्सव को लेकर माता मरियम के गोरोटो की रंग-रोगन, कार्यक्रम स्थल की साफ-सफाई और झालरों से भव्य सजावट की गयी है. पूरा परिसर दुल्हन की तरह सजा हुआ है. रोमन चर्च के पल्ली पुरोहित फादर निकोलस केरकट्टा ने बताया कि 8 नवंबर 1873 को छोटानागपुर में रोमन कलीसिया की शुरुआत खूंटपानी की इसी पवित्र धरती से हुई थी. तभी से हर वर्ष 8 नवंबर को इस ऐतिहासिक दिन की वर्षगांठ मनायी जाती है. इस अवसर पर करीब 10 हजार से अधिक ख्रीस्त विश्वासी और अन्य श्रद्धालु भाग लेते हैं. इस बार महोत्सव के मुख्य अनुष्ठाता जमशेदपुर धर्मप्रांत के बिशप तेलोस्फर होंगे. उनके साथ 50 से अधिक पुरोहित, फादर और सिस्टर भी सम्मिलित होंगे.ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह वही पवित्र भूमि है जहां 8 नवंबर 1873 को कोलकाता के आर्च बिशप स्टाइंस के हाथों 8 मुंडा परिवारों के 28 सदस्यों ने बपतिस्मा (संस्कार) ग्रहण किया था. ये लोग कोलकाता से बैलगाड़ी द्वारा चाईबासा पहुंचे थे. बपतिस्मा ग्रहण करने वाले प्रमुख परिवारों में जोसेफ, रावकन, पेत्रुस, सिदमा, पौलुस, रामसाय, जोहन, करमसिंह, अंद्रेयस सिबी और इग्नासिशीष नागु शामिल थे. इन्हीं से खूंटपानी में ईसाई धर्म की नींव पड़ी थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
