गुवा : गुवा सेल खदान में एक युवा अधिकारी की अचानक मौत के बाद मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा है. मृतक अधिकारी की पत्नी को नौकरी और आश्रितों को मुआवजा देने की मांग को लेकर मजदूरों ने खदान क्षेत्र में जाने वाली बसों को रोक दिया. आंदोलन के कारण लौह अयस्क का उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. सभी यूनियनों के समर्थन से शुरू हुआ यह आंदोलन अब और तेज होने लगा है.
ड्यूटी के दौरान सीने में उठा दर्द, फिर हो गई मौत
जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त को प्रथम पाली के दौरान एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दिवेंदु दास के सीने में अचानक दर्द उठा. सहकर्मी उन्हें तत्काल गुवा सेल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना के बाद कर्मचारियों और मजदूरों में शोक की लहर दौड़ गई. शनिवार की रात्रि पाली से मजदूरों ने खदान क्षेत्र में जाने वाली सभी बसों को रोक दिया. इसके कारण लौह अयस्क का उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया. आंदोलन को गुवा की सभी यूनियनों का समर्थन मिल गया है. मजदूरों ने स्पष्ट कर दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
आश्रित को नौकरी और मुआवजे की मांग
मजदूरों और यूनियनों का कहना है कि मृत अधिकारी के परिवार को कंपनी की ओर से नियमानुसार पूरा मुआवजा दिया जाए. इसके साथ ही उनकी पत्नी को सेल में नौकरी देने की मांग भी उठाई गई है. दिवेंदु दास करीब दो वर्ष पहले आसनसोल से गुवा सेल खदान में नियुक्त हुए थे. उनकी शादी को अभी केवल एक वर्ष हुआ था. बताया जा रहा है कि वह अपने वृद्ध माता-पिता के इकलौते पुत्र थे. उनकी पत्नी भी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं. ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
मौत को लेकर सामने आया अलग दावा
घटना को लेकर कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है. सेल के मुख्य महाप्रबंधक चंद्रभूषण कुमार ने बताया कि दिवेंदु दास की मौत घर जाने के दौरान रास्ते में हार्ट अटैक आने से हुई. वहीं, रविवार को भी मजदूरों का आंदोलन जारी रहा और खदान में उत्पादन पूरी तरह प्रभावित रहा.
