जिस गांव में गर्मी में पानी के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता था, अब वहीं तालाब से 5 एकड़ जमीन होगी सिंचित

नीलाइगोट गांव ने जल संरक्षण के ज़रिये गर्मी में पानी की किल्लत को दूर कर दिया है. अब 5 एकड़ जमीन की सिंचाई संभव है, जिससे खेती और आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे. सामुदायिक जल परिसंपत्ति का स्वामित्व एक महिला के नाम दर्ज होना खास है.

चाईबासा. कभी गर्मी शुरू होते ही बूंद-बूंद पानी के लिए पड़ोसी गांवों की राह नापने वाला नीलाइगोट अब अपने ही जलस्रोत से खेती और आजीविका की नई कहानी लिखने की तैयारी में है. करीब 140 आदिवासी परिवारों वाले इस गांव में जल संरक्षण की पहल ने वर्षों पुराने जल संकट के समाधान की उम्मीद जगायी है. अब पानी को खेती, मत्स्य पालन और ग्रामीणों की आय का आधार बनाने की तैयारी है.

इस पहल की खास बात यह है कि सामुदायिक जल परिसंपत्ति का स्वामित्व गांव की एक महिला के नाम दर्ज हुआ है. इससे जल संरक्षण के साथ प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी को भी मजबूती मिली है.

गर्मी में सूख जाते थे जलस्रोत, महिलाओं को जाना पड़ता था दूसरे गांव

गर्मी के दिनों में नीलाइगोट के तालाब और अन्य जलस्रोत सूख जाते थे. इसका सबसे ज्यादा असर रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता था. ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को स्नान और कपड़े धोने के लिए पड़ोसी गांवों तक जाना पड़ता था. पानी की कमी का असर खेती और ग्रामीणों की आय पर भी पड़ रहा था.

लंबे समय से चली आ रही समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्रामीणों ने खुद पहल की. ग्राम सभा और पानी पंचायत के माध्यम से गांव के जल संसाधनों का आकलन किया गया और जल संकट के कारणों पर चर्चा की गयी.

ग्राम सभा और पानी पंचायत ने निकाला रास्ता

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए रिसाव तालाब यानी परकोलेशन टैंक बनाने का निर्णय लिया गया. सर्वेक्षण में पोमा माझी की भूमि तालाब निर्माण के लिए उपयुक्त पायी गयी.

पोमा माझी ने सामुदायिक हित को प्राथमिकता देते हुए अपनी जमीन पर जल संरचना बनाने की सहमति दी. उन्होंने जलस्रोत का उपयोग गांव के दूसरे परिवारों को भी करने देने की बात कही. इसके बाद पानी पंचायत की सहमति से झारखंड सरकार के भूमि संरक्षण निदेशालय के माध्यम से रिसाव तालाब का निर्माण कराया गया.

महिला के नाम दर्ज हुआ सामुदायिक जल परिसंपत्ति का स्वामित्व

नीलाइगोट की इस पहल की सबसे खास बात यह है कि सामुदायिक जल परिसंपत्ति का स्वामित्व एक महिला के नाम दर्ज हुआ है. इससे जल संरक्षण के साथ प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और निर्णय लेने में महिलाओं की भूमिका को भी मजबूती मिली है.

पांच एकड़ जमीन को मिलेगा पानी, आय बढ़ाने की तैयारी

तालाब बनने के बाद ग्रामीण अब पानी को केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते. तालाब में मत्स्य पालन, मेड़ के आसपास सब्जी उत्पादन और कमांड क्षेत्र में दलहन की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है.

जल संरचना से करीब पांच एकड़ भूमि की सिंचाई की संभावना है. इससे कई परिवारों को कृषि आधारित गतिविधियों से आय बढ़ाने का अवसर मिल सकता है. जल उपलब्धता बढ़ने से खेती की उत्पादकता में सुधार और ग्रामीणों की आजीविका को स्थायित्व मिलने की उम्मीद है.

उपायुक्त बोले- जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ना जरूरी

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि नीलाइगोट की पहल बताती है कि ग्रामीण समुदाय प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी करे, तो स्थानीय स्तर पर स्थायी समाधान तैयार किए जा सकते हैं. जल संरक्षण की संरचनाओं को केवल पानी जमा करने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कृषि, मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि इस पहल में महिलाओं की भागीदारी और सामुदायिक सहमति महत्वपूर्ण है. पोमा माझी द्वारा सामुदायिक हित में अपनी भूमि उपलब्ध कराना और जलस्रोत को गांव के साझा उपयोग के लिए समर्पित करना सामाजिक सहभागिता और जिम्मेदारी का उदाहरण है.

नीलाइगोट में जल संरक्षण की यह पहल अब पानी की समस्या के समाधान के साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर तैयार करने की दिशा में कदम बन रही है.

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By Anil Ranjan

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