चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले के नेशनल हाइवे और राजकीय राजमार्गों के किनारे स्थित स्कूल-कॉलेज अब छात्रों के लिए ””””डेंजर जोन”””” बन गए हैं. जिला मुख्यालय चाईबासा सहित पूरे जिले में सड़कों के किनारे दर्जन भर से अधिक सरकारी व निजी विद्यालय संचालित हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिए न तो कहीं रंबल स्ट्रिप है और न ही जेब्रा क्रॉसिंग. सुरक्षा संबंधी सूचना पट्टिकाओं (साइनेज) के अभाव में तेज रफ्तार वाहन बच्चों के लिए काल बन रहे हैं.
इन स्कूलों के पास सबसे अधिक खतरा:
शहर और आसपास के इलाकों में सड़क किनारे स्थित प्रमुख शिक्षण संस्थान सड़क सुरक्षा की अनदेखी का शिकार हैं. संत विवेका व संत जेवियर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल, टाटा कॉलेज कॉलोनी सरकारी स्कूल, टेकासाई, सिकुरसाईं व डीवीसी कॉलोनी स्थित मध्य विद्यालय, महुलसाई रेलवे ओवरब्रिज क्षेत्र के संस्थान स्कूल सड़क किनारे स्थित है.जान हथेली पर रख सड़क पार करते हैं स्कूली बच्चे:
टेकासाई मध्य विद्यालय तो मुख्य मार्ग से मात्र 10-12 फीट की दूरी पर स्थित है. भारी मालवाहक वाहनों और बसों की रफ्तार इतनी अधिक होती है कि मासूम बच्चों को सड़क पार करने के लिए जान हथेली पर रखकर लंबा इंतजार करना पड़ता है.छात्रों ने खुद बनाया स्पीड ब्रेकर:
प्रशासनिक संवेदनशीलता का आलम यह है कि टाटा कॉलेज के पास छात्रों ने दुर्घटनाओं से तंग आकर अपने स्तर पर स्पीड ब्रेकर बनवाया है. अन्य स्कूल मार्ग कोई जेब्रा क्रॉसिंग नहीं है.खूनी से सनी सड़कें
4 साल में 603 मौतें
वर्ष सड़क हादसे घायल2022160 1502023121 123
2024185 1232025137 69
