नोवामुंडी: झारखंड के नोवामुंडी वन क्षेत्र में पिछले कई दिनों से हाथियों के झुंड की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों और किसानों की नींद उड़ गई है. हाथियों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है. जानकारी के अनुसार, करीब दो दिन पहले बड़ापासेया के गोमासाई क्षेत्र में 16 से 18 हाथियों का एक बड़ा झुंड देखा गया था.
इसके बाद शुक्रवार शाम को यही झुंड आगे बढ़ते हुए कातीकोड़ा गांव पहुंच गया. वहीं दूसरी ओर, लगभग आठ हाथियों का एक अन्य अलग झुंड टांकुरा क्षेत्र में लगातार विचरण कर रहा है. खास बात यह है कि इन झुंडों में छोटे हाथियों के साथ एक नन्हा शावक भी शामिल है, जिसके कारण वन विभाग और ग्रामीणों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं.
खेतों में खड़ी फसलें हो रही हैं बर्बाद, सेल्फी और वीडियो के चक्कर में जोखिम में डाल रहे जान
जंगल से निकलकर ये हाथी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंच रहे हैं. हाथी खेतों में खड़ी धान व अन्य फसलों को खाकर तथा अपने पैरों से रौंदकर भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं. हालांकि, गनीमत यह है कि अब तक हाथियों के हमले से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है.
वन विभाग की विशेष टीमें मुस्तैद, बंगाल और चाईबासा से बुलाई गई एक्सपर्ट यूनिट
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है. विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं और ग्रामीणों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा उनका पीछा न करने की लगातार अपील कर रही हैं. हाथियों को आबादी और खेतों से सुरक्षित दूर जंगल की ओर खदेड़ने के लिए चाईबासा, नोवामुंडी के अलावा पश्चिम बंगाल से भी विशेष 'हाथी भगाने वाली टीमें' बुलाई गई हैं.
ये विशेष टीमें लगातार हाथियों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं. दूसरी ओर, आक्रोशित व चिंतित ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को जल्द से जल्द सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने और उनकी बर्बाद हुई फसलों का उचित मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है. वन विभाग ने जनता से फिर अपील की है कि वे हाथियों के आसपास भीड़ बिल्कुल न लगाएं और रील या फोटो के चक्कर में अपनी जान जोखिम में न डालें.
