Chaibasa News : गरीब बच्चों के विकास के लिए बाल संरक्षण योजना से जोड़ें : डीसी

जिला समाहरणालय में उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में एकीकृत बाल संरक्षण योजना, बाल कल्याण, बाल सुधार गृह, बाल तस्करी व बाल मजदूरी से संबंधित बैठक की गयी.

चाईबासा.

जिला समाहरणालय में उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में एकीकृत बाल संरक्षण योजना, बाल कल्याण, बाल सुधार गृह, बाल तस्करी व बाल मजदूरी से संबंधित बैठक की गयी. इस दौरान उपायुक्त ने पिछली बैठक में दिये गये निर्देशों के अनुपालन का बिंदुवार अवलोकन किया. साथ ही मिशन वात्सल्य, बाल संरक्षण योजना आदि योजनाओं से संबंधित प्रगति प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी.

बाल संरक्षण योजना का उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास

डीसी ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संचालित बाल संरक्षण योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब व जोखिम तबके के बच्चों का सर्वांगीण विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करना है. कहा कि उक्त योजना के तहत लाभुकों को 4000 प्रति माह वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है. उपायुक्त ने बाल संरक्षण कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि जिला अंतर्गत कठिन परिस्थिति में रहने वाले अधिकाधिक परिवार के बच्चों को चिह्नित कर योजना का लाभ दें. डीसी ने दो माह में अधिकतम 1000 बच्चों को योजना से जोड़ने का निर्देश दिया. गरीब बच्चों के विकास के लिए बाल संरक्षण योजनाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है. ये योजनाएं उन्हें सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण प्रदान करती हैं.

सेविका के माध्यम से परिवार को जागरूक करें

डीसी ने पालन पोषण देखभाल योजना (फोस्टर केयर) के तहत जोखिम तबके के बच्चों के लिए परिवार आधारित पालन पोषण के लिए इच्छुक परिवारों की संख्या को बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश दिये. उन्होंने कहा कि योजना के तहत जोखिम स्थिति वाले बच्चों को भी बेहतर शिक्षा एवं उचित पालन पोषण मिले, इसके लिए सेविका के माध्यम से संबंधित परिवार को जागरूक करते हुए उनका चयन करें. इसे ऐसे परिवारों के साथ बच्चों को बेहतर पालन पोषण के लिए जोड़ते हुए उन्हें वित्तीय लाभ दिया जा सके.

15 बच्चों को फोस्टर केयर योजना से जोड़ा गया

बैठक में बताया गया कि मिशन वात्सल्य बाल संरक्षण योजना के तहत स्पॉन्सरशिप कार्यक्रम के तहत कुल 370 बच्चों को बेहतर पालन पोषण के लिए वित्तीय लाभ दिया गया है. फोस्टर केयर के तहत 15 बच्चों को परिवार आधारित पालन पोषण से जोड़ा गया है. बैठक में उपायुक्त द्वारा उक्त दोनों योजना से अच्छादित बच्चों का नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा की निगरानी का उद्देश्य बच्चों का बेहतर पालन पोषण सुनिश्चित करना है. साथ ही यह भी देखना है कि पालन पोषण के लिए बच्चों के परिवार एवं पालक परिवारों को दिये जा रहे वित्तीय लाभ की राशि का अधिकतम फायदा संबंधित बच्चों को ही मिले.

बाल देखरेख संस्थान से संबंधित प्रतिवेदन की समीक्षा

उपायुक्त ने बाल देखरेख संस्थान से संबंधित प्रतिवेदन की भी समीक्षा की. बताया गया कि इसके तहत बाल कुंज में 79 बच्चे, ऑब्जर्वेशन होम में 44 बच्चे तथा छाया बालिका गृह में 44 बालिकाएं आवासित हैं. इस पर उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को उपरोक्त सभी संस्थानों को बेहतर एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक सामग्रियों एवं अन्य आवश्यकताओं से संबंधित सूची तैयार करने का निर्देश दिया. इस मौके पर पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी, सदर चाईबासा अनुमंडल पदाधिकारी संदीप अनुराग टोपनो, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक खुशेन्द्र सोनकेसरी, श्रम अधीक्षक अविनाश ठाकुर व जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनीता तिवारी आदि मौजूद थे.

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