चाईबासा में ‘कोल्हान में हो राजभाषा की दावेदारी’ पुस्तिका भेंट, आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग पर जोर

चाईबासा में 'कोल्हान में हो राजभाषा की दावेदारी' पुस्तिका भेंट की गई. हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग पर जोर दिया गया. 'तुरतुङ' कार्यक्रम से करीब 2 लाख लोग साक्षर हुए.

चाईबासा. हो भाषा साहित्यकार और आदिवासी हो द्वितीय राजभाषा कार्य समिति के संयोजक डोबरो बुड़ीउली ने बुधवार को टाटा स्टील फाउंडेशन के चाईबासा स्थित मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर में प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर शंखनील बासु को ‘कोल्हान में हो राजभाषा की दावेदारी’ पुस्तिका भेंट की. पुस्तिका का लोकार्पण 30 अगस्त को रांची विधानसभा अतिथि सभागार में आयोजित आदिवासी हो द्वितीय राजभाषा दिवस की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया था.

बुड़ीउली ने कहा कि वर्ष 2011 में हो भाषा को झारखंड की द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला. अब इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दावेदारी को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं. उन्होंने हो भाषा के प्रशासनिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1837 के विल्किनसन रूल्स में भी हो भाषा के न्यायिक और प्रशासनिक उपयोग का प्रावधान था.

‘तुरतुङ’ कार्यक्रम से करीब दो लाख लोग हुए साक्षर

इस अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से संचालित हो भाषा-लिपि साक्षरता कार्यक्रम ‘तुरतुङ’ का भी उल्लेख किया गया. जानकारी के अनुसार, वर्ष 2012 से संचालित इस कार्यक्रम के तहत झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में करीब दो लाख लोगों को वाराङक्षिति लिपि में साक्षर किया गया है.

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By Anil Ranjan

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