चक्रधरपुर.
शहर के पोड़ाहाट स्टेडियम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण विवाह व सुदामा चरित्र की संगीतमय प्रस्तुति सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गये. भागवत कथा वाचक महाराज जीतू दास ने सोमवार को श्रीकृष्ण विवाह व सुदामा चरित्र प्रसंग पर विस्तार से प्रवचन दिया. महाराज श्री दास ने कहा कि भागवत कथा में कृष्ण विवाह का मुख्य प्रसंग रुक्मिणी विवाह है. राजकुमारी रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के गुणों और रूप के बारे में सुनकर मन ही मन उनसे विवाह करने का निश्चय किया था. जबकि रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से कराने का फैसला किया. इस कारण श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी से विवाह किया. देवी रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं, जो मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं. रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के साहस और वीरता के बारे में सुना था. योजना के तहत रुक्मिणी ने सुदेव नामक ब्राह्मण से एक पत्र श्रीकृष्ण तक पहुंचाने का अनुरोध किया. रुक्मिणी पूजा के लिए मंदिर गयी तो भगवान श्रीकृष्ण वहां पहुंचे और विधिपूर्वक विवाह किया. रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. यह विवाह दर्शाता है कि लक्ष्मी और नारायण कभी अलग नहीं रह सकते. कथावाचक ने कृष्ण रुक्मिणी विवाह को भजन कीर्तन के माध्यम से प्रस्तुत किया. महाराज श्री दास ने कहा कि सुदामा चरित्र प्रसंग में भगवान कृष्ण और उनके बचपन के मित्र सुदामा की दोस्ती को दर्शाया गया है. भागवत कथा में सुदामा की गरीबी और कृष्ण की उदारता का अति मनमोहक वर्णन किया. यह कथा सिखाती है कि नि:स्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है. क्योंकि सुदामा ने अपने मित्र से कुछ भी नहीं मांगा. अंत में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
