गुवा. गुवा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, बड़ाजामदा और पूरे सारंडा क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. इनमें सबसे दयनीय स्थिति बड़ाजामदा की है, जहां मूसलाधार बारिश शुरू होते ही पहाड़ियों से उतरने वाला सैलाब शहर के कई हिस्सों में तबाही मचा देता है. हालात इतने भयावह हो जाते हैं कि कई घरों के अंदर चार से पांच फीट तक पानी भर जाता है. घरों में रखा कीमती फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और राशन समेत रोजमर्रा का सारा सामान पानी में डूबकर बर्बाद हो जाता है. लाखों रुपये लगाकर बनाए गए पक्के मकान भी बरसात के दिनों में लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन चुके हैं.
उफान पर किरीबुरू के तालाब और लेक गार्डन
इधर किरीबुरू में भी लगातार हो रही वर्षा से जलप्रलय जैसी स्थिति बन गई है. लोकेश्वर नाथ मंदिर तालाब और लेक गार्डन तालाब पूरी तरह लबालब भर चुके हैं. जलस्तर खतरनाक तरीके से बढ़ने के कारण पानी जाकिर हुसैन पार्क परिसर के अंदर तक घुस गया है. सीजीएम आवास और मंदिर दो के बीच बनी पुलिया पर दोनों तरफ के तालाबों के पानी का भारी दबाव बन गया है, जिससे स्थानीय लोगों और राहगीरों में पुलिया के क्षतिग्रस्त होने की आशंका को लेकर दहशत बनी हुई है. हालांकि वैकल्पिक मार्ग मौजूद है, लेकिन लोग प्रशासन से एहतियातन इस पुलिया की तुरंत जांच कराने की मांग कर रहे हैं.
स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में उन्हें इसी तरह के नरकीय जीवन और भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक पहाड़ी पानी की निकासी के लिए कोई ठोस या स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है. बार-बार की लापरवाही से क्षेत्र की बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खुल चुकी है. स्थानीय नागरिकों और प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि कागजी खानापूर्ति और अस्थायी राहत के बजाय पानी की स्थायी निकासी के लिए जल्द से जल्द मेगा प्लान तैयार कर उसे जमीन पर उतारा जाए, ताकि सारंडा अंचल के लोगों को हर साल बाढ़ जैसी आपदा से मुक्ति मिल सके.
