Chaibasa News: कातिगुटू गांव में बैठक कर ग्रामीणों ने जतायी आपत्ति, कहा-नहीं देंगे जमीन

चाईबासा : एनएच बायपास निर्माण के लिए जमीन का कागजात मांगने पर भड़के ग्रामीण

चाईबासा.राष्ट्रीय राजमार्ग 75 (इ) के चाईबासा बायपास सड़क निर्माण के नाम पर अंचल कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा गांवों में जाकर लोगों को ग्रामीण मुंडा से सत्यापित कराने के बाद अपनी जमीन के कागजात जमा कराने की घोषणा से कातिगुटू के ग्रामीणों में रोष है. ग्रामीणों ने इसे बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उक्त बातें शुक्रवार को खूंटकटी रैयत रक्षा समिति के तत्वावधान में कातिगुटू गांव में हुई बैठक में ग्रामीण मुंडा सिदियु पुरती ने कही. उन्होंने अपने मौजा के ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि हमलोग भी इस देश के नागरिक हैं और हमलोगों को अपने तरीके से जीवन जीने का मौलिक अधिकार है. उन्होंने कहा कि खासकर हम आदिवासी-मूलवासियों का जीवन जीने का मुख्य स्रोत उनकी कृषि भूमि ही है. वहीं ग्रामीणों ने कहा कि राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरूआ सहित जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अंचल अधिकारी व संबंधित अधिकारियों को अपनी बहुफसली सिंचित कृषि भूमि देने के लिए लिखित आवेदन कर कई बार असहमति सौंपी गयी है. बावजूद जमीन का कागजात जमा करने को कहा जा रहा है.

जीवन, संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ी है जमीन

ग्रामीण मुंडा ने कहा कि हमारा जीवन, संस्कृति और धार्मिक आस्था इसी जमीन पर आधारित है. इसलिए हमलोगों को अपनी जमीन बचाने के लिए अंतिम समय तक लड़ाई जारी रखनी है. मौके पर उपस्थित झारखंड पुनरुत्थान अभियान के मुख्य संयोजक सन्नी सिंकु ने कहा कि आज कोल्हान के वीर शहीद गंगाराम कालुंडिया का शहादत दिवस है. हम कातीगुटू गांव से ही उनके शहादत को सादर नमन अर्पित करते हैं. हम कोल्हान के लोगों को वीर शहीद गंगाराम कालुंडिया से प्रेरणा लेकर विस्थापन के खिलाफ लड़ने की आवश्यकता है.

पदयात्रा कर सौंप चुके हैं चार सूत्री मांग पत्र

श्री सिंकु ने कहा कि वीर शहीद गंगाराम कालुंडिया ने कुजू डैम से विस्थापित होने वाले आदिवासी–मूलवासियों की रक्षा करने और अपनी मूल संस्कृति को बचाने की लड़ाई लड़ी थी. उनके संघर्ष के कारण ही 44 वर्ष बीतने के बाद भी अब तक कुजू डैम नहीं बन पाया है. उन्होंने कहा कि हम भी बायपास सड़क निर्माण कार्य के नाम पर आदिवासी-मूलवासियों को अनैच्छिक रूप से विस्थापित करने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं. इसको लेकर 25 मार्च को शहीद पार्क से उपायुक्त कार्यालय तक पदयात्रा निकाली गयी थी. उपायुक्त को चार सूत्री मांग पत्र भी सौंपा गया था. उस दिन वार्ता में उपायुक्त हमलोग को आश्वस्त किये थे कि जिला भू-अर्जन पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी के साथ बैठक करने के बाद फिर सूचना दी जायेगी, लेकिन उपायुक्त एवं जिला भू-अर्जन पदाधिकारी या अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा बिना कोई उचित सूचना दिये प्रस्तावित चाईबासा बाईपास सड़क निर्माण कार्य से संभावित विस्थापित होने वाले 16 गांवों में गाड़ी भेजकर जमीन मालिकों को मुंडा से सत्यापित कराकर जमीन के कागजात जमा करने का अनाउंसमेंट कराना हम आदिवासी-मूलवासियों के साथ ज्यादती और प्रताड़ना है. बैठक को केदारनाथ कालुंडिया, अरिल सिंकु व विशाल गुड़िया सहित अन्य ग्रामीणों ने भी संबोधित किया. इसकी अध्यक्षता एवं संचालन बलभद्र संवैया ने किया.

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