156वें साल में और भव्य होगी अमला टोला की दुर्गा पूजा, पुरानी समिति पर ही जताया भरोसा

चाईबासा के अमला टोला में दुर्गा पूजा समिति की बैठक हुई, जिसमें 2026 में होने वाली पूजा को भव्य और सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित करने पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 156 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को बनाए रखने के लिए पिछली समिति पर ही भरोसा जताया गया है.

चाईबासा: अमला टोला दुर्गा मंदिर परिसर में दुर्गा पूजा समिति की सामान्य बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष तपन कुमार मित्रा ने की. संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव त्रिशानु राय ने किया. बैठक में दुर्गा पूजा-2026 को भव्य, आकर्षक, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.

पिछले साल के आय-व्यय का हुआ मिलान

बैठक की शुरुआत पिछले वर्ष आयोजित दुर्गापूजा के आयोजन, व्यवस्था और आय-व्यय के ब्योरे की समीक्षा से हुई. सदस्यों के सामने आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से संपुष्ट किया गया. इसके बाद आगामी दुर्गा पूजा की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई.

सदस्यों ने कहा कि अमला टोला की दुर्गा पूजा 156 वर्षों से चली आ रही परंपरा है. यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि चाईबासा की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है. इसलिए ऐतिहासिक गरिमा को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था, अनुशासन और सुचारु संचालन पर जोर दिया जाएगा.

पिछले साल की समिति ही करेगी आयोजन

बैठक में सर्वसम्मति से विगत वर्ष की पूजा समिति को ही यथावत रखने का निर्णय लिया गया. सदस्यों ने कहा कि निरंतरता, अनुभव और आपसी समन्वय के साथ इस वर्ष पूजा को और बेहतर तरीके से आयोजित किया जाएगा.

समिति में मुख्य संरक्षक उद्योगपति मुकुंद रूंगटा, संरक्षक मिथिलेश कुमार ठाकुर, राजश्री बासु और नंदो फौजदार हैं. अध्यक्ष तपन कुमार मित्रा, उपाध्यक्ष सुप्रियो फौजदार एवं गोपाल चटर्जी, सचिव प्रभाष कुमार सरकार, संयुक्त सचिव त्रिशानु राय एवं भरत रूंगटा, कोषाध्यक्ष सुदीप सिन्हा, सह कोषाध्यक्ष सुभम शर्मा एवं वैभव बजाज हैं.

बैठक में प्रतिमा विसर्जन अनुज्ञप्ति संयुक्त सचिव त्रिशानु राय के नाम हस्तांतरित करने का भी सर्वसम्मत निर्णय लिया गया. अनुज्ञप्ति हस्तांतरण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है.

समिति ने कहा कि अमला टोला की दुर्गा पूजा चाईबासा की आस्था, परंपरा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. 1870 से चली आ रही यह परंपरा कई पीढ़ियों को जोड़ते हुए आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है.

बैठक में संकल्प लिया गया कि 156वें वर्ष की पूजा ऐतिहासिक परंपरा के अनुरूप भव्यता और गरिमा के साथ आयोजित की जाएगी. इसके लिए सभी पदाधिकारी और सदस्य आपसी सहयोग एवं सामूहिक सहभागिता से कार्य करेंगे.

इस अवसर पर सचिव प्रभाष कुमार सरकार, चित्तरंजन दास, प्रसुन कुमार राय, आलोक मजुमदार, कृषनेन्दु राय, अनूप मुखर्जी, गौतम सरकार, रोहित रूंगटा, सुदीप सिन्हा, कौशिक पिरोजीवाला, मानव जोशी, दीपक सेनगुप्ता, देबनाथ सरकार, सुभम शर्मा, पार्थो सेनगुप्ता, भरत रूंगटा, सोमेन सरकार, तड़ित विश्वास, स्वाधीन बनर्जी, अभिजीत सरकार, अरुण बनर्जी, पिंटू घोष सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे.

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By Bhagirathi Mahato

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