झींकपानी: चाईबासा सीमेंट वर्क्स (एसीसी सीमेंट प्लांट, झींकपानी) में क्लोजर नोटिस जारी होने के बाद सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ा है. प्लांट से सीमेंट ढुलाई से जुड़े वाहन मालिकों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. सैकड़ों वाहन चालक, ट्रांसपोर्ट कर्मचारी और लोडिंग-अनलोडिंग से जुड़े मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. कभी वाहनों की आवाजाही से गुलजार रहने वाले ट्रांसपोर्ट कार्यालयों में अब सन्नाटा पसरा है.
चार माह से खड़े ट्रकों पर उगी घास, चालक लौटे घर
प्लांट से सीमेंट की ढुलाई करने वाले कई ट्रक मालिकों ने अपने वाहनों को एसीसी पार्किंग एरिया में खड़ा कर दिया है. ट्रकों को लॉक कर चालक भी अपने घर लौट गये हैं. पिछले करीब चार माह से खड़े वाहनों पर अब घास उग आयी है और जंगली लताओं ने उन्हें घेर लिया है. पार्किंग में एक साथ खड़े ट्रकों की तस्वीर प्लांट बंद होने के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबार की बदहाली बयां कर रही है. वाहन मालिकों का कहना है कि काम बंद होने के बावजूद वाहनों की किस्त लगातार चुकानी पड़ रही है.
कमाई बंद, किस्त जारी... कैसे संभलेगा कारोबार?
वाहन मालिकों ने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग बंद होने से आय का मुख्य जरिया खत्म हो गया है. इसके बावजूद बैंक की किस्त, वाहन का रखरखाव और अन्य खर्च लगातार जारी हैं. ऐसे में आर्थिक स्थिति दयनीय होती जा रही है. उनके साथ वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं.
लोडिंग-अनलोडिंग का काम करने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी भी छिन गयी है. सवाल यह है कि यदि प्लांट में जल्द गतिविधियां शुरू नहीं हुईं, तो महीनों से खड़े इन ट्रकों के मालिक किस्त और दूसरे खर्चों का बोझ कब तक उठायेंगे? प्लांट के क्लोजर का असर अब सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं, बल्कि इससे जुड़े पूरे ट्रांसपोर्ट तंत्र की कमर टूटती दिख रही है.
