10 लाख का इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम ने किया सरेंडर, दो महिला माओवादियों ने भी छोड़ा हथियार

पश्चिमी सिंहभूम जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है. 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर ने साथियों सहित आत्मसमर्पण कर दिया है. यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ डांगिल ने शुक्रवार को जिला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. उसके साथ संगठन की दो महिला माओवादी कैडर ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है.

रांची स्थित पुलिस मुख्यालय ने तीनों के आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि की है. आत्मसमर्पण करने वाली महिला माओवादियों में कोदो मुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी और पिंकी शामिल हैं. पद्मनी पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो थाना क्षेत्र के रेंगड़ा टोला, बंगलासाई की रहने वाली है. उस पर झारखंड सरकार ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. वहीं, दूसरी महिला माओवादी पिंकी गोइलकेरा थाना क्षेत्र के इचागोड़ा की निवासी बताई गई है.

कोल्हान में प्रभावशाली नाम था सालुका कायम

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सालुका कायम के अन्य नाम सालुका, डांगिल, मारू और भुवनेश्वर हैं. वह प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के साउथ जोन सेंट्रल कमेटी (SZC) का सक्रिय सदस्य और कोल्हान क्षेत्र में संगठन का प्रभावशाली जोनल कमांडर माना जाता था.

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, सालुका कायम सोडो कायम का पुत्र है और पश्चिमी सिंहभूम के सोनुवा थाना क्षेत्र के कुदाबुरू कायमसाई गांव का रहने वाला है. उसका नाम लंबे समय से राज्य के वांछित और इनामी माओवादियों की सूची में शामिल रहा है.

लगातार बढ़ रहा था सुरक्षा बलों का दबाव

पिछले कई महीनों से कोल्हान क्षेत्र में झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की ओर से नक्सल विरोधी अभियान तेज किया गया है. जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाने, माओवादी ठिकानों को ध्वस्त करने और संगठन के खिलाफ कार्रवाई से नक्सल गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है.

पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई, संगठन की घटती ताकत और संसाधनों की कमी के साथ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने भी माओवादियों को हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रभावित किया है. इन्हीं परिस्थितियों के बीच सालुका कायम ने आत्मसमर्पण का फैसला लिया.

माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका

सालुका कायम कोल्हान क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों के संचालन और कैडरों को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था. उसके आत्मसमर्पण को क्षेत्र में माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसके मुख्यधारा में लौटने से संगठन के नेटवर्क और कैडरों के मनोबल पर असर पड़ सकता है.

वहीं, दो महिला माओवादी कैडरों का एक साथ आत्मसमर्पण भी संगठन के कमजोर होते आधार का संकेत माना जा रहा है.

सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. जो भी माओवादी हथियार छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित नीति के तहत आवश्यक सहायता और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.

सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि सालुका कायम और दो महिला माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय अन्य माओवादी भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए आगे आएंगे.


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By Anil tiwary

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