Budha Pahad Visit : वो इलाका जो कभी नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था. जहां लाल आतंक बेखौफ हुआ करता था. जहां फिजाओं में मौत और हवाओं में बारूद की गंध हुआ करती थी. आज लंबे समय बाद किसी मंत्री ने उस इलाके का दौरा किया. यह इलाका बूढ़ा पहाड़ के नाम से जाना जाता है. जहां कभी नक्सलियों की अदालतें लगती थीं, आज वहां लोकतंत्र की धमक दिखाई दे रही थी. वोट से चुनी सरकार का मंत्री उस दुर्गम इलाके में मौजूद था.
वित्तमंत्री ने किया दौरा
बूढ़ा पहाड़ में शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का दौरा किया. यह दौरा कई मायनों में अहम रहा. यह इलाका दुर्गम माना जा है. जहां कभी नक्सलियों की अदालतें लगा करती थीं. मगर, अब ये शांत है. दुर्गम रास्तों से होते हुए सड़क, पैदल और बाइक के सहारे झारखंड के वित्तमंत्री राधाकृष्ण दोपहर करीब दो बजे मंत्री यहां पहुंचे. यह दौरा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सरकार की जमीनी सक्रियता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
सुरक्षा और विकास पर फोकस
बूढ़ा पहाड़ पहुंचते ही वित्त मंत्री ने सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. पिकेट पर तैनात जवानों और अधिकारियों से बातचीत की. इसके बाद उन्होंने जवानों के सामने जो चुनौतियां हैं उसे समझने की कोशिश की. राधाकृष्ण ने साफ कहा कि सुरक्षा बलों की वजह से ही उग्रवाद पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो पाया है.
जन-अदालत वाले इलाके का भी किया निरीक्षण
ये इलाका कभी मौत की गारंटी मानी जाती थी, जहां बंदूकों के साए में नक्सलियों की हुकूमत चला करती थी, मंत्री राधाकृष्ण ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया. मंत्री उस जगह भी गए जहां ‘जन-अदालत’ लगा करती थी. मंत्री के इस दौरे को इस इलाके में बदलते हालात और शांति की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है.
सड़क, स्कूल और अस्पताल का ऐलान
दौरे के दौरान मंत्री ने कई अहम घोषणाएं भी है. राधाकृष्णा ने कुल्ही से बूढ़ा पहाड़ तक सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि यहां के बच्चों की पढ़ाई के लिए हेसातु में हाई स्कूल की स्थापना की जाएगी. ताकि यहां शिक्षा के रास्ते से नक्सल का पूरी तरह से सफाया हो सके. उन्होंने इस क्षेत्र में कुल्ही में अस्पताल बनाने का भी ऐलान किया है. इसके अलावा गढ़वा डीसी को 10 दिनों के भीतर समीक्षा बैठक कर ठोस कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया गया है.
नहीं हटेंगे CRPF कैंप, स्पष्ट रुख
मंत्री ने साफ कहा कि इस इलाके से अभी भी नक्सल आतंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ऐसे में जल्दबाजी में CRPF कैंप हटाने का फैसला सही नहीं होगा. जब तक लोगों को सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक सुरक्षा बलों की मौजूदगी जरूरी है.
‘लाल आतंक’ को सीधा संदेश
वित्त मंत्री ने कहा, भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उग्रवाद कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता. विकास के दम पर ही इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है. उन्होंने नक्सल आंदोलन से जुड़े लोगों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ें. उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र में बंदूक की कोई जगह नहीं है.
ग्राउंड रियलिटी उजागर
मंत्री ने माना कि योजनाएं पहुंची हैं, लेकिन उनका पूरा लाभ अभी लोगों तक नहीं पहुंच पाया है.आज भी लोग सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं.कुल मिलाकर, बूढ़ा पहाड़ का यह दौरा सुरक्षा और विकास लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरे के जरिए यह साफ संदेश है कि अब बंदूक नहीं, विकास ही इस इलाके का भविष्य तय करेगा.
