सीसीएल बीएंडके एरिया की कारो परियोजना के विस्तार को लेकर नये पैच में चल रहा कार्य बैदकारो, चरकपनिया व बड़कीकुड़ी के ग्रामीणों ने शनिवार को ठप करा दिया. आंदोलन कोयलांचल विस्थापित संघर्ष मोर्चा के बैनर तले किया गया. ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ आंदोलन पर उतरे और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की. कहा कि वार्ता में बनी सहमति के बावजूद प्रबंधन मांगों पर तीन माह बाद भी सकारात्मक पहल नहीं कर रहा है. आंदोलन के कारण आउटसोर्सिंग कंपनी की मशीनें कार्यस्थल पर खड़ी रहीं.
मोर्चा के पदाधिकारी व एचएमकेयू के प्रदेश महासचिव इंद्रदेव महतो ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन ग्रामीणों के अधिकार को कुचल रहा है. पेड़ों की कटाई रोकने को लेकर विगत कई माह से आंदोलन किया गया. बाद में सीसीएल प्रबंधन, प्रशासन और ग्रामीणों की वार्ता पूर्व के जीएम के की उपस्थिति में हुई थी. इसमें डेढ़ सौ स्थानीय ग्रामीणों को आउटसोर्सिंग कंपनी में रोजगार देने, लोकल सेल शुरू कर उसमें रोजगार मुहैया कराने, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाएं धरातल पर उतारने सहित 70 सूत्री मांगों पर प्रबंधन ने सहमति जतायी थी. इसके बाद नये जीएम आये, परंतु वार्ता में तय बिंदुओं पर पहल नहीं की जा रही है. जब तक मांगों पर ठोस पहल नहीं होगी, कार्य ठप रहेगा. बाद में गांधीनगर थाना प्रभारी धनंजय कुमार सिंह व सीसीएल के कई अधिकारी पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, परंतु ग्रामीण नहीं माने. समाचार लिखे आंदोलन जारी था. आंदोलन में अहमद हुसैन, तेजलाल महतो, भोला महतो, राजेश महतो, सूरज महतो, योगेंद्र महतो, कालेश्वर महतो, मनोज हेंब्रम, राजू मुर्मू, बुधन मांझी, धनेश्वर मांझी, अबुल अंसारी, वासुदेव मांझी, सोनाराम मांझी, दुर्गा किस्कू, आफताब आलम, सहदेव महतो, सुक्कू महतो, नसीम अंसारी, नारायण महतो, श्यामलाल मुर्मू, मुकुंद हेंब्रम, शिबू महतो, बुधनी देवी, मनवा देवी, सोमरी देवी, मंगरी देवी, कंकिया देवी, निमिया देवी, मीनवा देवी, किरण देवी, हेमीया देवी, परनी देवी, मालती देवी, हीरामणि देवी, प्यासी देवी आदि शामिल थे.आबादी के निकट संचालित खदान को बंद करने की मांग
सीसीएल ढोरी एरिया के एएडीओडीएम (अमलो) परियोजना से प्रभावित रैयत विस्थापितों ने गुरुवार को कोडरमा जोन के डीजीएमएस (खान सुरक्षा निदेशक) को पत्र लिख कर आबादी के निकट संचालित खदान को बंद करने की मांग की है. पत्र के माध्यम से लालमोहन यादव, राजेश गुप्ता, बबिता देवी, मोहन यादव ने कहा कि परियोजना के अधीन संचालित हाइवाल माइनिंग माइंस को प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों को ताक पर रख कर संचालित किया जा रहा है. आबादी से 30-35 मीटर की दूरी पर माइंस चलायी जा रही है. विस्थापितों को प्रबंधन द्वारा अब तक नियोजन व मुआवजा भी मुहैया नहीं कराया गया है. हाइवाल माइनिंग का कार्य मनसोल कंपनी द्वारा कराया जा रहा है. पुरनाटांड़ के विस्थापितों को जब तक नौकरी, मुआवजा नहीं दिया जायेगा और पुनर्वास नहीं कराया जायेगा, तब तक ग्रामीणों (विस्थापित) के घरों के नीचे से कोयला निकालने का काम बंद किया जाये. कहा कि 25 दिसंबर को आउटसोर्सिंग हाइवाल माइनिंग माइंस में पत्थर की चपेट में आने से एक ठेका मजदूर की मौत हो गयी थी. इससे पूर्व 12 दिसंबर 1998 में भी उक्त माइंस में ब्लास्टिंग के कारण पत्थर की चपेट में आने से एक महिला की ही मौत हो गयी थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
