जैनामोड़: ऐसे तो सावन में क्षेत्र के लोग हर शिवालय में पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं.लेकिन चास प्रखंड के जरीडीह गांव में तीन शिवालय ऐसा ही कि अगर कोई गांव में किसी भी पर्व त्यौहार में पूजा करने आते हैं तो तीनों भोलेनाथ के मंदिरों में धूप अगरबत्ती नहीं दिखाते हैं तो पूजा अधूरी लगती है.भक्तों को खुद भगवान शिव अपने पास बुलाते हैं.
पुरना शिव मंदिर भगवान शिव बुलाते हैं अपने पास
गांव का पहला शिव मंदिर लगभग 300 वर्ष पुराना है जो खुद ही निकला है गांव के लोगों ने बताया कि पहले इस जगह एक जमीन के अंदर से शिवलिंग प्रकट हुए थे इसके बाद गांव लोगों सिंदूर,बेलपत्र व अक्षत्र देकर ने पूजा करने के साथ तीन से चार दिनों तक उसी जगह बैठ मन्नत मांगते थे.
जहां भगवान शिव किसी रूप में आकर उस भक्त आशीर्वाद देकर चले जाते हैं.इस गांव ऐसे कई लोग हैं जो पुत्र व पुत्री प्राप्त होने के लिए मन्नत मांगते हैं जिसकी मन्नत साल भर में पूर्ण हो जाती है आज भी इस मंदिर में बाहर से कई लोग संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगने के लिए पहुंचते हैं.हैरानी का विषय यह है कि यहां प्रचंड गर्मी में भी मंदिर परिसर के बाहर व मंदिर के अंदर कदम रखते हैं एसी से भी ज्यादा ठंडी हवाओं का अहसास होने लगता है.
मंदिर पुजारी गोपाल ठाकुर ने बताया कि इस शिव मंदिर में हजारों भक्त आते हैं वह मन्नत मांगते हैं जिसकी मन्नत भी पूर्ण होती है इसे मैं भी देखा हूं.इस मंदिर में पूजा करने के बाद श्रद्धालुओं को अजब सी खुशी मिलती है.
बांका शिव मंदिर सभी जीव जंतुओं को देते हैं आशीर्वाद
गांव में एक ऐसा मंदिर जो शिव को मंदिर पसंद ही नहीं है.गांव के लोगों ने बताया कि गांव में बाबा भोलेनाथ का एक रूप है जो बहुत अद्भुत है.यह शिवलिंग पूरे काले रंग के पत्थर रुप में टेढ़ा आकृति लिए शिवलिंग निकाला है. गांव के बुजुर्ग लोगों का कहना था पीपल पेड़ के नीचे वर्षों पहले निकला था जो गांव के सभी गाय व बैल का गोठ उस जगह जाना जरूरी था.जिसके बाद ही गाय और बैल घर पहुंचते थे.
गांव के लोगों को यह समझ में नहीं आता था कि गांव के जानवर इस जगह क्यों आते हैं जिसके बाद लोगों यह अनोखा पत्थर दिखाई दिया.जिसके बाद मंदिर बनाने का प्रयास भी किया गया लेकिन बाबा भोला मंदिर बनने से पहले गांव कुछ ना कुछ घटना घट जाती थी.इसके बाद आज भी बाबा भोलेनाथ खुले आसमान में विराजमान है.जो सभी जीव जंतु व प्राणियों के लिए भोलेनाथ आशीर्वाद देते हैं
आत्मरक्षा व शांति के लिए बनाया गया शिव मंदिर
गांव का स्थापित एक ऐसा शिव मंदिर जिसे पुलिस प्रशासन व अधिकारी भी आने के सर झुका कर आशीर्वाद मांगते आते. इतना ही नहीं आजादी के पूर्व अंग्रेजों ने भी इस मंदिर में आकर बाबा भोलेनाथ से आशीर्वाद मांगा है. गांव के लोगों ने बताया कि जब धनबाद व बोकारो जिला नहीं बना था उस समय जरीडीह गांव में शांति व्यवस्था रखने के लिए जरूरी में थाना को स्थापित किया गया था.
उस वक्त इस गांव में जरीडीह थाना होना एक बहुत बड़ी बात थी.जिसके बावजूद क्षेत्र में घटना होती ही थी जिस पंडितों के द्वारा कहा गया कि थाना प्रभारी के द्वारा इस शिव मंदिर का अच्छी तरह से निर्माण कर रोज पूजा पाठ किया जायेगा तो क्षेत्र में शांति बनी रहेगी.जिसके बाद थाना के पहले थानेदार में प्रतिदिन शिव मंदिर में पूजा पाठ करने के बाद थाना पहुंचते थे.जिसके बाद क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहुत अच्छा होता गया.
