Bokaro News : हूल दिवस पर महानायकों को किया गया नमन

Bokaro News : हूल दिवस पर जगह-जगह कार्यक्रम का आयोजन कर महानायकों को नमन किया गया.

महुआटांड़. हूल दिवस पर जगह-जगह कार्यक्रम हुए. कसियाडीह फुटबॉल मैदान (टीकाहारा) में सिदो-कान्हु हूल महासमिति व जगेसर मांझी परगना के संयुक्त तत्वाधान में तथा कारीटोंगरी (तुलबुल) में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सर्वप्रथम नायके बाबा ने स्मारक स्थल में पारंपरिक ढंग से बोंगा बुरु संपन्न किया. इसके बाद संथाल विद्रोह के महानायक शहीद सिदो-कान्हु को नमन करते हुए लोगों ने अन्याय व शोषण के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करने का दम भरा. मुख्य अतिथि राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता, उत्पाद एवं मद्द निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने माल्यार्पण कर सिदो-कान्हु को नमन किया.

उन्होंने कहा कि आज का दिन झारखंड और पूरे देश के लिए एक गौरवशाली इतिहास को स्मरण करने का दिन है. वर्ष 1855 में आज ही के दिन सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फुलो-झनो के नेतृत्व में हजारों संथाल वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत और जमींदारी शोषण के खिलाफ आवाज उठायी थी. इसने 1857 की क्रांति से पहले ही आजादी की चिंगारी जला दी थी. आज का दिन अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने की प्रेरणा देता है. तुलबुल के कार्यक्रम में समिति के आग्रह पर मंत्री ने सिदो-कान्हु की प्रतिमा स्थापित कराने की घोषणा की. कसियाडीह में आयोजकों ने मंत्री को सिदो-कान्हु की तस्वीर भेंट की. कसियाडीह के कार्यक्रम में बबुली सोरेन, शांति हांसदा, पप्पू हांसदा, निमाय सिंह, रूपलाल बेसरा, दिनेश कुमार मुर्मू, अनिल हांसदा, सुखराम हांसदा, सुंदरलाल हांसदा, बिरालाल मुर्मू, संतोष मरांडी, सुखराम हांसदा, जितेंद्र, कैलाश महतो तथा तुलबुल के कार्यक्रम में मुखिया ममता देवी, पूर्व पंसस हेमंत केवट, फिकरु साव, हीरालाल यादव, मुकेश सोरेन, समिति के हीरालाल मांझी, फूलचंद हेंब्रम, संझलू मुर्मू, धनीलाल बेसरा, बबलू मुर्मू, भगवान दास मांझी, रामचंद्र हांसदा, दिलीप सोरेन, हीरालाल सोरेन, प्रदीप मुर्मू, पारसनाथ मांझी, प्रकाश सोरेन आदि उपस्थित थे.

आदिवासी समिति ने मनाया हूल दिवस

चंद्रपुरा/दुगदा. सिदो-कान्हू चौक दुगदा में आदिवासी सामाजिक सुरक्षा समिति, आदिवासी विकास मंच चंद्रपुरा, सरहुल पूजा समिति चंद्रपुरा व दुगदा के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम किया गया. इससे पूर्व जुलूस भी निकाला गया. कार्यक्रम में झारखंड के वीर-वीरांगनाओं के संघर्ष को याद करते हुए वक्ताओं ने हूल आंदोलन की पृष्ठभूमि से अवगत कराया. कार्यक्रम में कई जगहों के मांझी बाबा सहित अनिल मुर्मू, लालजी बास्के, दुखन मुर्मू, श्यामलाल किस्कू, रामबल्लभ किस्कू, श्यामलाल हांसदा, सीताराम मांझी, सहदेव बास्के, दिनेश किस्कू, अजय सोरेन आदि थे.

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