दावा पेश नहीं करने वालों को जाना पड़ेगा एलए कोर्ट

बरलंगा-कसमार सड़क चौड़ीकरण के रैयतों के बीच लगाया गया शिविर

कसमार.

गोला प्रखंड के बरलांगा से शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा होते हुए कसमार तक निर्माणाधीन सड़क चौड़ीकरण कार्य के लिए जमीन अधिग्रहण के एवज में मुआवजा भुगतान को लेकर शनिवार को कसमार प्रखंड मुख्यालय के सभागार में जिला भू-अर्जन विभाग के द्वारा रैयतों के बीच शिविर लगाया गया. इसमें मुख्यतः मंजूरा एवं जामकुदर गांव के अलावा कसमार, बगियारी आदि गांवों के कतिपय रैयत भी शामिल हुए. इस दौरान मंजूरा गांव के कुल 60 अवार्डी में 46 तथा जामकुदर गांव के कल 33 में से 19 अवार्डी की सुनवाई की गयी. शिविर को संबोधित करते हुए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारिका बैठा ने बताया कि दावा प्रस्तुत करने लिए यह अंतिम सुनवाई है. इस सुनवाई के बाद भी अगर कोई रैयत मुआवजा संबंधी जरूरी आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं कर पाते हैं तो उनका पैसा एलए कोर्ट, हजारीबाग भेज दिया जाएगा और बाद में उन्हें जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत कर वहीं से पैसा निकालना पड़ेगा. लेकिन दो चार दिनों में अगर आपसी विवादों को निपटाकर जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा पेश करते हैं तो उनका भुगतान जिला भूअर्जन से संभव है. शिविर में यह बात सामने आयी कि छोटे-छोटे आपसी विवादों और उलझनों के कारण कई रैयत जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कर पाते हैं. जिसके परिणामतः उनका मुआवजा भुगतान नहीं हो पा रहा है. शिविर में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारिका बैठा, कानूनगो रूपेश कुमार, सीओ सुरेश कुमार सिन्हा, अंचल निरीक्षक, राजस्व कर्मचारी, अमीन अनुज कुमार व सनत कुमार, कार्य एजेंसी गंगा कंस्ट्रक्शन के अधिकारी नरेंद्र पांडेय, सौरभ साहू, विकास तिवारी आदि मौजूद थे.

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