आनंद मार्ग प्रचारक संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत 22 मई से होने वाले तीन दिवसीय विश्व स्तरीय धर्म महासम्मेलन को संबोधित करने रविवार को आनंद नगर पहुंचे. आनंदमार्गियों ने उनका स्वागत किया. उन्होंने कहा कि लोग ज्यादा से ज्यादा कीर्तन करें. अनन्य भाव से कीर्तन करें. बाबा नाम केवलम् अनन्य भाव का कीर्तन है. जड़ वस्तु के प्रति अत्याधिक आकर्षण के कारण अवसाद होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 34 करोड़ से अधिक अवसाद रोग के मरीज पूरी दुनिया में हैं. भारत में करीब छह करोड़ लोग इससे ग्रस्त हैं. आर्थिक विषमता के कारण समाज बिखर गया है. स्वतंत्रता की आड़ में युवक-युवतियां चारित्रिक पतन की ओर उन्मुख हो रहे हैं और अंततः हताश, निराश हो कर अवसादग्रस्त हो रहे हैं.
शिक्षकों के चयन में सावधानी जरूरी
आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंद नगर में आयोजित पांच दिवसीय शिक्षा प्रशिक्षण शिविर रविवार को शुरू हुआ. इसकी शुरुआत प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुई. उद्घाटन आनंद मार्ग की केंद्रीय समिति के सदस्य आचार्य विकाशानंद अवधूत ने किया. आचार्य तथागतानंद अवधूत ने कहा कि शिक्षकों का चयन बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए. केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता शिक्षक बनने का अधिकार प्रदान नहीं करता है. शिक्षकों में व्यक्तिगत ईमानदारी, चरित्र की दृढ़ता, सदाचार, समाजसेवा की भावना, निस्वार्थता, प्रेरणादायक व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण अवश्य जरूरी हैं. क्योंकि शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. यदि शिक्षकों को आदर्श स्त्री-पुरुषों के निर्माण के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना है, तो शिक्षक को केवल एक शिक्षण मशीन बने रहने के बजाय, शैक्षिक नीतियां बनाने का अधिकार भी अवश्य दिया जाना चाहिए. मौके पर केंद्रीय जनसंपर्क सचिव आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत सहित अन्य मौजूद थे.
