मुकेश झा
Bokaro: झारखंड की सांस्कृतिक पहचान सरहुल पर्व बोकारो में बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. इस अवसर पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने प्रकृति की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की. सरहुल पर्व के मौके पर सुबह से ही श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर सरना स्थलों पर पहुंचे. पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर साल वृक्ष की डालियों की पूजा की, जिसे प्रकृति और जीवन का प्रतीक माना जाता है.
एक-दूसरे को दी सरहुल की बधाई
पूजा के बाद लोगों ने एक-दूसरे को सरहुल की शुभकामनाएं दीं और सामूहिक नृत्य-गान का आयोजन किया गया. मांदर और नगाड़ों की थाप पर युवक-युवतियां पारंपरिक नृत्य करते नजर आए, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा. महिलाओं ने भी इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पारंपरिक गीतों के माध्यम से प्रकृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की. जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इस दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके. विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी आयोजन में सहयोग किया और लोगों के बीच भाईचारे का संदेश दिया. सरहुल पर्व के माध्यम से लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया. वक्ताओं ने कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है और इसे सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है.
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