Bokaro News : लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार रैयतों को अपनी जमीन पर हक मिल गया. कसमार थाना क्षेत्र के सुरजूडीह मौजा में रविवार को कोर्ट के आदेश पर दंडाधिकारी की मौजूदगी में सवा एकड़ भूमि पर डुगडुगी बजाकर रैयतों को विधिवत दखल-कब्जा दिलाया गया. यह मामला पिछले 30 वर्षों से सिविल कोर्ट में लंबित था. अरालडीह पंचायत के बनचास गांव निवासी मतीन अंसारी सहित अन्य रैयतों ने जमीन पर जबरन कब्जे के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. मामले की सुनवाई के बाद सिविल कोर्ट, जूनियर डिवीजन के जज ने रैयतों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी जमीन को वैध ठहराया और दखल-दियानी का आदेश पारित किया. रविवार को आदेश के आलोक में दंडाधिकारी की उपस्थिति में रैयतों को जमीन का कब्जा सौंपा गया. रैयत मतीन अंसारी ने बताया कि सुरजूडीह मौजा में 98.5 डिसमिल और 9 डिसमिल भूमि पर कोर्ट ने दखल-दियानी करायी. उन्होंने कहा कि यह क्षण उनके परिवार और वंशजों के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि तीन दशक तक संघर्ष करने के बाद न्याय मिला है. दखल-दियानी की प्रक्रिया से पूर्व विपक्षी पक्षकारों को कोर्ट द्वारा नोटिस भेजकर सूचित किया गया था. मौके पर सिविल कोर्ट के नाजिर और रैयत पक्ष के अधिवक्ता सिद्धेश्वर महतो भी मौजूद थे. इस अवसर पर सदर मोहम्मद शेरे आलम, पूर्व सदर इस्लाम अंसारी, मोहीब अंसारी, हबीब अंसारी, नबीब अंसारी, शहीद अंसारी, शमीम अंसारी, सफीक अंसारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और रैयत के वंशज मौजूद थे.
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