प्रधानमंत्री पोषण योजना (पीएम पोषण) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से राशि की निकासी और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गयी है. झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने नई वित्तीय व्यवस्था लागू करने का निर्देश जारी किया है. इसके तहत अब योजना से संबंधित सभी भुगतान भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म से जुड़ी एसएनए स्पर्श प्रणाली के माध्यम से किये जायेंगे.
13 अगस्त को जारी हुआ निर्देश
झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक समीरा एस. ने 13 अगस्त को राज्य के सभी उपायुक्तों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को पत्र जारी कर नई व्यवस्था को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है. विभाग का उद्देश्य वित्तीय लेन-देन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाना है.
डीएसई होंगे डीडीओ
नई व्यवस्था के तहत जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) को ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) की जिम्मेदारी दी गयी है. जिला स्तर पर कंप्यूटर ऑपरेटर को मेकर तथा कार्यालय के लिपिक या लेखा लिपिक को चेकर बनाया गया है. वहीं प्रखंड और विद्यालय स्तर पर संबंधित प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी मेकर की भूमिका निभायेंगे.
डिजिटल हस्ताक्षर से पूरी होगी प्रक्रिया
नई प्रणाली के अनुसार मेकर भुगतान संबंधी विपत्र तैयार कर ऑनलाइन अपलोड करेंगे. इसके बाद चेकर दस्तावेजों की जांच कर डिजिटल हस्ताक्षर अथवा ई-साइन के माध्यम से उसे डीडीओ के पास भेजेंगे. डीडीओ द्वारा सत्यापन के बाद प्रस्ताव को कोषागार के लिए अग्रसारित किया जायेगा. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी.
10 दिनों में देना होगा अनुपालन प्रतिवेदन
प्राधिकरण ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि नई व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई 10 दिनों के भीतर पूरी कर उसकी रिपोर्ट उपलब्ध करायी जाये. योजना के तहत होने वाले सभी व्यय और भुगतान की अंतिम जवाबदेही जिला शिक्षा अधीक्षक की होगी.
बढ़ेगी पारदर्शिता और निगरानी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि एसएनए स्पर्श और ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के माध्यम से भुगतान होने से धनराशि के उपयोग की निगरानी अधिक प्रभावी होगी. साथ ही भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा और लाभार्थियों तक राशि समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी.
