बोकारो. मोबाइल अपडेट के नाम पर भेजे गये एक संदिग्ध संदेश के जरिए साइबर अपराधियों ने गोमिया के एक प्रवासी मजदूर और उसकी पत्नी के बैंक खातों से कुल 48 हजार रुपये की निकासी कर ली. घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करायी है. मामले की जानकारी मिलने के बाद साइबर ठगी के प्रति लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.
पीड़ित मनोज महतो चतरोचट्टी थाना क्षेत्र की लोधी पंचायत अंतर्गत तिसरी गांव का निवासी है. वह महाराष्ट्र के पुणे में एक निजी कंपनी में हाइवा चालक के रूप में कार्यरत है. परिजनों के अनुसार, वह करीब दो माह पहले बरसात के दौरान अपने गांव आया था. इसी बीच आठ सितंबर को उसके मोबाइल फोन पर मोबाइल अपडेट से संबंधित एक संदेश प्राप्त हुआ.
लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हुआ हैंग
मनोज महतो के अनुसार, संदेश में दिये गये लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन अचानक हैंग हो गया और करीब 20 मिनट तक बंद रहा. मोबाइल सामान्य होने के बाद जब उन्होंने अपने बैंक खातों की जांच की, तो खातों से रकम निकाले जाने की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी की जांच शुरू की.
संयुक्त खाते से निकाली गयी अधिकतर राशि
पीड़ित के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया की गोमिया शाखा में संचालित संयुक्त खाते से 46 हजार रुपये की निकासी की गयी. इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, गोमिया शाखा के खाते से दो हजार रुपये निकाले गये. इस प्रकार दोनों खातों से कुल 48 हजार रुपये की अवैध निकासी हुई. पीड़ित का आरोप है कि संदिग्ध लिंक के माध्यम से साइबर अपराधियों ने बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर ठगी को अंजाम दिया.
साइबर हेल्पलाइन में दर्ज करायी शिकायत
घटना के बाद मनोज महतो ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करायी. उन्होंने संबंधित एजेंसियों से राशि वापस कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. घटना के कारण परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
थाना को नहीं मिला आवेदन
इस संबंध में चतरोचट्टी थाना प्रभारी शशि शेखर कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी थाना को नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि पीड़ित की ओर से अब तक कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है. आवेदन मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी.
साइबर सुरक्षा को लेकर सावधानी जरूरी
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अनजान लिंक, अपडेट संदेश या संदिग्ध एप्लिकेशन पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए. बैंक, मोबाइल कंपनी या सरकारी संस्थान आमतौर पर संवेदनशील जानकारी मांगने के लिए ऐसे लिंक नहीं भेजते हैं. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देना जरूरी है.
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