नाकामी ने बदला रास्ता, हौसला नहीं; मंजूरा के अभिश्वर ने गांव में खड़ी की डेयरी

बोकारो के अभिश्वर महतो ने नाकामी के बाद गांव में डेयरी व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। जानिए उनकी सफलता की प्रेरणादायक कहानी।

पहली कोशिश में मिली नाकामी कई लोगों को अपने सपने छोड़ने पर मजबूर कर देती है, पर मंजूरा (झरमूंगा) के अभिश्वर महतो ने नाकामी को नयी शुरुआत का आधार बनाया. पॉल्ट्री व्यवसाय में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने गांव छोड़कर शहर में रोजगार तलाशने के बजाय वहीं अवसर खोजा.

नवंबर 2025 में 20 गायों से शुरू किया गया उनका डेयरी व्यवसाय करीब नौ महीने में दुगुना हो गया है. आज साहीवाल और एचएफ नस्ल की गायों से प्रतिदिन करीब चार क्विंटल दूध का उत्पादन हो रहा है. इसकी आपूर्ति कसमार क्षेत्र के करीब 20 गांवों में हो रही है.

फोटो दूध लेकर बाजार में निकले अभिश्वर महतो | Prabhat Khabar Network

दूध निकालने की मशीन और चारे के लिए खेती भी

अभिश्वर ने करीब दो एकड़ जमीन पर डेयरी फार्म विकसित किया है. लगभग एक एकड़ में पशुओं के लिए शेड और अन्य सुविधाएं तैयार की गयी हैं. मौसम अनुकूल मवेशियों के रखरखाव की व्यवस्था के साथ दूध निकालने के लिए आधुनिक मशीन है. चारे की जरूरत पूरी करने के लिए करीब दो एकड़ जमीन पर हरे चारे की खेती भी की जा रही है.

बाइक से घर-घर पहुंचाते हैं दूध

अभिश्वर का काम केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है. वे खुद बाइक से ग्राहकों के घर तक दूध पहुंचाते हैं. इससे उपभोक्ताओं से सीधा जुड़ाव बना और धीरे-धीरे अपना ग्राहक वर्ग तैयार हुआ. कसमार, मंजूरा, खैराचातर, सिंहपुर, हरनाद और बगदा समेत करीब 20 गांवों में दूध की आपूर्ति की जा रही है. दूध के अलावा पनीर की बिक्री भी होती है.

20 से 40, अब 100 गायों का लक्ष्य

अभिश्वर ने नवंबर 2026 तक फार्म में गायों की संख्या 100 करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए बुनियादी ढांचा के विस्तार का काम चल रहा है. उनका कहना है कि 100 गायें होने के बाद बोकारो और बोकारो थर्मल जैसे शहरी क्षेत्रों में दूध की आपूर्ति बढ़ाने की योजना है, जहां से मांग आ रही है.

फोटो दूध लेकर बाजार में निकले अभिश्वर महतो | Prabhat Khabar Network

परिवार में सबका मिलता है सहयो

गडेयरी संचालन में उनके पुत्र और भतीजे प्रवीण कुमार महतो, गिरिधारी महतो, नवीन महतो, हरिहर महतो, सिद्धेश्वर महतो, रवींद्र महतो और भीखू राम महतो सहयोग करते हैं. पटना में कोचिंग संस्थान चलाने वाले उनके भतीजे विनोद बिहारी महतो भी व्यवसाय को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन करते हैं. अभिश्वर खुद को साधारण कृषक बताते हैं. उनका कहना है कि नाकामी ने राह बदली, मंजिल नहीं. डेयरी ने उन्हें गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनने की नयी दिशा दी है।


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लेखक के बारे में

By दीपक सवाल

मैं दीपक सवाल, 1994 से प्रभात खबर से जुड़ा हूं। वर्ष 2011 से 2015 तक बोकारो कार्यालय में स्टॉफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत रह चुका हूं। 2015 से कसमार डेटलाइन से कार्यरत हूं। मेरा संपर्क नंबर : 9431145607

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