पहले खुद अपनाया, अब किसानों को देंगे सीख; 22 एकड़ में जैविक खेती का प्रयोग

प्रगतिशील किसान महावीर सिंह चौधरी ने 22 एकड़ खेत में जैविक धान की खेती का प्रयोग शुरू किया है. उन्होंने मई से खेत की तैयारी कर वर्मी कंपोस्ट, बायो पोटाश और नीम खली का प्रयोग किया. इसका उद्देश्य किसानों को रसायनमुक्त खेती के फायदे समझाना है.

किसी नई कृषि पद्धति पर किसानों का भरोसा तभी मजबूत होता है, जब उसके परिणाम सामने हों. इसी सोच के साथ चास प्रखंड के प्रगतिशील किसान, प्रखंड 20 सूत्री अध्यक्ष सह चास विधायक प्रतिनिधि और एसएस इंटर कॉलेज के सचिव महावीर सिंह चौधरी ने लोबुडीह गांव स्थित अपने 22 एकड़ खेत में धान की जैविक खेती का प्रयोग शुरू किया है. उनका उद्देश्य जैविक खेती की पूरी प्रक्रिया स्वयं अपनाकर उसके परिणाम किसानों के सामने रखना और क्षेत्र में प्राकृतिक एवं रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा देना है.

मई से शुरू की खेत की तैयारी

महावीर सिंह चौधरी ने बताया कि जैविक धान की खेती के लिए मई से खेत की तैयारी शुरू की गयी. इस दौरान खेत में वर्मी कंपोस्ट, बायो पोटाश और नीम खली का प्रयोग किया गया. जून में धान के बीज का बायो-एनपीके कंसोर्टिया से बीजोपचार कर नर्सरी तैयार की गयी. जुलाई में जैविक मंत्र और ह्यूमिक एसिड का प्रयोग करने के बाद धान की रोपाई की गयी. अगस्त में खेत में निराई-गुड़ाई का काम चल रहा है.

दूसरे खेतों की तुलना में फसल की हरियाली अधिक

चौधरी के अनुसार, जैविक खेती वाले खेत में धान की फसल की हरियाली आसपास के दूसरे खेतों की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है. इससे उन्हें बेहतर उत्पादन की उम्मीद है. हालांकि वास्तविक उपज का आकलन फसल तैयार होने और कटाई के बाद ही किया जा सकेगा.

पहले खुद प्रयोग, फिर किसानों को करेंगे प्रेरित

महावीर सिंह चौधरी ने कहा कि किसानों को केवल जैविक खेती अपनाने की सलाह देने के बजाय पहले स्वयं इसका प्रयोग करना अधिक प्रभावी होगा. इसलिए उन्होंने अपने खेत को प्रयोग का माध्यम बनाया है. वे खेती की लागत, प्रक्रिया, फसल की स्थिति और उपज का अनुभव स्वयं कर रहे हैं, ताकि बाद में क्षेत्र के किसानों के साथ वास्तविक अनुभव साझा किया जा सके.

मिट्टी और पर्यावरण के लिए भी उपयोगी

उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल रासायनिक उर्वरकों का विकल्प नहीं है, बल्कि मिट्टी, फसल और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की पद्धति है. जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. साथ ही रसायन अवशेषों से मुक्त कृषि उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा.

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील

चौधरी ने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ किसान उठा सकते हैं. परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण, भ्रमण और प्रमाणीकरण जैसी सुविधाओं का प्रावधान है. उन्होंने किसानों से कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की जानकारी लेकर लाभ उठाने की अपील की.

उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक पद्धति का लाभ लेकर किसान जैविक खेती को व्यवस्थित तरीके से अपना सकते हैं. उनका प्रयास है कि चास प्रखंड में जैविक खेती का ऐसा उदाहरण तैयार हो, जिसे देखकर दूसरे किसान भी रसायनमुक्त खेती की ओर कदम बढ़ाएं.


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By Brahm deo dubey

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