बोकारो जिला अंतर्गत पिंड्राजोरा क्षेत्र की 18 वर्षीय युवती के लापता होने से संबंधित हेवियस कॉर्पस याचिका पर झारखंड हाइकोर्ट ने सुनवाई की. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पक्ष सुनने के बाद सरकार को बोकारो में बरामद नर कंकाल के डीएनए से मिलान करने के लिए लापता युवती के माता-पिता का सैंपल एम्स देवघर में लेने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने कहा कि सैंपल लेने की कार्रवाई छह मई को की जाये. अनुसंधानकर्ता रिम्स से कंकाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेकर छह मई को देवघर एम्स को देंगे. इसके बाद डीएनए का मिलान करने के लिए सैंपल एम्स से कोलकाता सीएफएसएल भेजा जायेगा, जहां उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की जायेगी.
मामले की अगली सुनवाई 14 मई को
खंडपीठ ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को अगली सुनवाई तक डीएनए टेस्ट रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 14 मई को होगी. इससे पहले रिम्स की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि बरामद नर कंकाल का पोस्टमार्टम कर लिया गया है, इसकी रिपोर्ट आ गयी है. वहीं प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की व अधिवक्ता शांतनु गुप्ता ने पैरवी की. पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने बताया था कि डीएनए सैंपल कलेक्शन के लिए नामकुम आर्मी हॉस्पिटल में स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट उपलब्ध नहीं है. उल्लेखनीय है कि लापता 18 वर्षीय युवती की मां ने हेवियस कॉर्पस याचिका दायर की है. युवती 31 जुलाई 2025 से लापता थी. मामले को लेकर पिंड्राजोरा थाना में कांड संख्या-147 /2025 दर्ज किया गया था.
जांच में लापरवाही बरतने पर पूरा थाना हो गया था सस्पेंडमालूम हो कि उच्च न्यायालय के आदेश पर लापता युवती को खोजने के लिए डीजीपी तदाशा मिश्रा ने सीआइडी डीआइजी संध्या रानी मेहता को पिंड्राजोरा भेजा था. एक दिन की जांच पड़ताल के बाद मामला का खुलासा हो गया. पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के जंगल से एक कंकाल बरामद किया गया, जिसे पुलिस ने युवती का बताया. इसके बाद तत्कालीन एसपी हरविंदर सिंह ने जांच में लापरवाही बरतने, अभियुक्त को मदद करने सहित अन्य आरोप में पिंड्राजोरा थाना के सभी 28 अधिकारियों व कर्मियों को सस्पेंड कर दिया था.