Bokaro News : बंदी के कगार पर है गोविंदपुर यूजी माइंस, बोर्ड से अनुमति का इंतजार

Bokaro News : कभी सीसीएल में थी 42 भूमिगत खदानें, अब मात्र तीन

Bokaro News : कभी सीसीएल में थी 42 भूमिगत खदानें, अब मात्र तीनबंद ढोरी खास इंक्लाइन. Bokaro News : राकेश वर्मा, बेरमो : कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई सीसीएल में कभी 42 यूजी माइंस (भूमिगत खदानें) थीं. अब मात्र तीन यूजी माइंस (अंडरग्राउंड माइंस) चल रही हैं. इसमें सीसीएल ढोरी एरिया की ढोरी खास यूजी माइंस और चुरी भूमिगत खदान के अलावा कथारा एरिया की गोविंदपुर यूजी माइंस शामिल है. केदला यूजी माइंस तथा भुरकुंडा की हाथीदाडी भूमिगत खदान करीब दो साल से सीटीओ नहीं मिलने से बंद है. बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल स्थित कोल इंडिया की एकमात्र मैनुअल भूमिगत खदान कथारा एरिया की गोविंदपुर यूजी माइंस बंदी के कगार पर है. हालांकि वर्तमान इसमें छिटपुट उत्पादन हो रहा है. 29 मई 2024 को सीसीएल जेसीएसी की बैठक में प्रबंधन ने इस माइंस में कार्यरत 197 पीस रेटेड कर्मियों को टाइम रेटेड करने पर सहमति दी थी. सीसीएल के आदेश के तहत इस माइंस में कार्यरत सभी 197 पीस रेटेड मजदूरों को टाइम रेटेड में कन्वर्ट कर दिया गया है.

गोविंदपुर यूजी माइंस में 400 मजदूर हैं कार्यरत

फिलहाल गोविंदपुर यूजी माइंस में लगभग 400 कर्मी कार्यरत हैं. बंदी के कगार पर खडी इस माइंस में कार्यरत कर्मियों को दूसरे जगह समायोजित नहीं किया गया है. प्रबंधन सूत्रों के अनुसार इस भूमिगत खदान को बंद करने को लेकर सीसीएल बोर्ड में कोई निर्णय पारित नहीं हुआ है. प्रबंधन के अनुसार, गोविंदपुर यूजी माइंस से पूर्व में प्रतिदिन 125-150 टन तथा महीना 40-50 हजार टन वाशरी ग्रेड तीन व चार कोयला का उत्पादन हो रहा है. पीओ एके तिवारी के अनुसार फिलहाल रोजाना यहां से 30-40 टन कोयला उत्पादन हो रहा है. सीसीएल बोर्ड ने इस माइंस को बंद करने की अनुमति नहीं दी है. वर्तमान में यह माइंस रनिंग स्टेज में है.

माइंस में 4.3 मिलियन टन कोयला है रिजर्व

गोविंदपुर यूजी माइंस में लगभग 4.3 मिलियन टन कोयला रिजर्व है. यह पूरी तरह मैनुअल लोडर माइंस है जहां मैनुअल लोडिंग व उत्पादन होता है. यहां से उत्पादित कोयला स्वांग वाशरी में भेजा जाता है. वॉश के बाद यह कोयला स्टील प्लांटों में जाता था. यह यूजी माइंस करोडों के घाटे में चल रही है. वर्ष 2024-25 में इस माइंस का घाटा 125 करोड़ था. प्रबंधन यहां से उत्पादित कोयला प्रति टन 2408 रुपये की दर से बेचता था और उत्पादन लागत लगभग 35 हजार रुपये आता था. इस माइंस में पीजीपीटी, डिप्लोमा व अप्रैटिंस से जुड़े सैकडों छात्र ट्रेनिंग लेते थे. मालूम हो कि माइनिंग सरदार, ओवरमैन, अंडर मैनेजर के लिए ट्रेनिंग का मुख्य सेंटर यूजी माइंस ही होता है. एटक नेता लखनलाल महतो कहते हैं कि इस माइंस को ट्रेनिंग के लिए मॉडल माइंस बनाया जाये, जहां डिप्लोमा, डिग्री, फर्स्ट क्लास, सेकेंड क्लास मैनेजर, माइनिंग सरदार, ओवरमैन, अंडर मैनेजर, पीजीपीटी आदि की ट्रेनिंग हो सके. इस माइंस को बचाने के लिए प्रबंधन को सोचना चाहिए. फिलहाल कोल इंडिया में कई यूजी माइंसों को रेवेन्यू शेयरिंग में दिया गया है.

10 दिनों से बंद है ढोरी खास चार-पांच व छह नंबर इंक्लाइन

सीसीएल ढोरी एरिया अंतर्गत ढोरी खास चार, पांच व छह नंबर इंक्लाइन में आग लगने की घटना के बाद से कोयला खनन बंद है. इस माइंस से रोजाना 400 टन कोयला उत्पादन होता था. इसी इंक्लाइन से सटी ढोरी खास सात-आठ नंबर भूमिगत खदान में उत्पादन चल रहा है. ढोरी खास की 4,5.6 एवं 7, 8 इंकलाइन को मिलाकर कुल 525 मैन पावर है. इसमें 4,5,6 भूमिगत खदान में 212 टीआर व 35 एमआर मजदूर और लगभग 15 अधिकारी कार्यरत हैं. इस परियोजना को सीसीएल विभागीय चला रहा है. 17 जून ढोरी खास 4,5,6 भूमिगत खदान के पंखा घर के इंट्री प्वाइंट के समीप एक नंबर पिलर में आग लग गयी थी. जिसमें 42 मजदूर बाल बाल बचे थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >