थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए बोकारो में 12 सितंबर को निःशुल्क एचएलए टेस्टिंग कैंप आयोजित किया जायेगा. कैंप में 12 वर्ष से कम उम्र के थैलेसीमिया मरीजों के साथ उनके जैविक भाई-बहनों के एचएलए सैंपल लिये जायेंगे. जरूरत पड़ने पर माता-पिता के सैंपल भी लिये जा सकते हैं. कैंप का उद्देश्य संभावित एचएलए मैचिंग डोनर की पहचान करना है, जिससे बोन मैरो ट्रांसप्लांट की संभावना तलाशने में मदद मिल सके.
कैंप का आयोजन नारायणा हेल्थ सिटी, बेंगलुरु के सहयोग से डीकेएमएस फाउंडेशन इंडिया, मां सेवा समिति ट्रस्ट और लायंस क्लब ऑफ बोकारो के समर्थन से किया जा रहा है. इसकी जानकारी आयोजकों अजय केडिया, अखिलेश श्रीवास्तव, निखिल श्रीवास्तव, भागवत भवेश, राज कुमार महथा, गोपाल मुरारका और संजय सोनी ने रविवार को सेक्टर तीन क्लब में पत्रकारों को दी.
पिछले कैंप में 147 मरीजों के लिये गये थे सैंपल
आयोजकों ने बताया कि 30 नवंबर 2024 को बोकारो में आयोजित पहले एचएलए टेस्टिंग कैंप में 147 थैलेसीमिया मरीजों के सैंपल लिये गये थे. जांच के बाद 39 मरीजों के लिए फुल एचएलए मैच मिला. इनमें 27 बच्चों का नारायणा हेल्थ सिटी, बेंगलुरु में सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जा चुका है.
खास बात यह रही कि इन सभी 27 बच्चों का उपचार निःशुल्क किया गया. आयोजकों के अनुसार, पिछले कैंप के परिणाम को देखते हुए इस बार भी अधिक से अधिक पात्र मरीजों और उनके परिवारों को जांच का लाभ देने की तैयारी है.
सैंपल जर्मनी भेजकर होगी एचएलए मैचिंग
कैंप में मरीजों के साथ उनके सभी जैविक भाई-बहनों के एचएलए सैंपल निःशुल्क लिये जायेंगे. जरूरत पड़ने पर माता-पिता के सैंपल भी लिये जा सकते हैं. लिये गये सैंपल जर्मनी भेजे जायेंगे, जहां एचएलए मैचिंग की प्रक्रिया के माध्यम से संभावित डोनर मैच की पहचान में मदद मिलेगी.
परिवारों से कैंप का लाभ उठाने की अपील
आयोजकों ने थैलेसीमिया से पीड़ित 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के परिवारों से 12 सितंबर को आयोजित कैंप का लाभ उठाने की अपील की है. उनका कहना है कि एचएलए मैचिंग से उपयुक्त डोनर की पहचान होने पर जरूरतमंद मरीजों के इलाज की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू करने में मदद मिल सकती है.
