खटाल के साये में बचपन, बदहाल व्यवस्था के बीच शिक्षा की अलख जगा रहा उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय

बोकारो के सेक्टर-6 स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बदहाली का शिकार है। कीचड़ भरी सड़क और सुरक्षा के अभाव में बच्चे शिक्षा पाने को मजबूर हैं।

बोकारो: बोकारो सेक्टर-06 स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, कामधेनु खटाल की तस्वीर सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत को बयां करती है. कामधेनु खटाल (गाय-भैंस के तबेले) के सामने स्थित इस विद्यालय में हर दिन गरीब और मजदूर परिवारों के बच्चे तमाम अभावों के बावजूद पढ़ने पहुंचते हैं.

वर्ष 2003 से संचालित यह विद्यालय पहले चरवाहा विद्यालय के नाम से जाना जाता था. समय बदला, नाम बदला, लेकिन विद्यालय की बदहाली नहीं बदली. कक्षा एक से पांच तक संचालित इस विद्यालय में कभी बच्चों की संख्या काफी अधिक थी, लेकिन अब घटकर मात्र 58 रह गई है. तीन शिक्षक सीमित संसाधनों के बीच बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं.

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय तक पक्की सड़क, चारदीवारी, खराब चापाकल की मरम्मत, शौचालय की नियमित सफाई, चोरी हुए सामान की पुनर्स्थापना और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित कर दी जाए, तो यहां पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर माहौल मिल सकता है. सरकारी योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा, जब बच्चों को सुरक्षित और सुविधायुक्त विद्यालय उपलब्ध कराया जाएगा.बरसात में कीचड़ पार कर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे

विद्यालय तक पहुंचने वाली सड़क बरसात में दलदल में तब्दील हो जाती है. छोटे-छोटे बच्चों को रोजाना कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है. कई बार बच्चे गिरकर चोटिल भी हो जाते हैं. अभिभावकों का कहना है कि वर्षों से सड़क की समस्या बनी हुई है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है. ऐसे में बारिश का मौसम बच्चों और अभिभावकों दोनों की चिंता बढ़ा देता है.

तीन भवन और सात कमरे, लेकिन सुरक्षा पूरी तरह नदारदविद्यालय परिसर में तीन भवन और सात कक्षाएं हैं. पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे है. पूरे परिसर में बाउंड्रीवाल नहीं है. इसका नतीजा यह है कि कोई भी व्यक्ति आसानी से विद्यालय में प्रवेश कर सकता है. बच्चों को मध्याह्न भोजन की सुविधा मिलती है, लेकिन सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण का अभाव साफ नजर आता है.चोर ले गए खिड़कियां और तड़ित चालक

विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भवन में लगी टीन की सभी खिड़कियां चोरी हो चुकी हैं. इतना ही नहीं, भवन पर लगा तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) भी चोर उखाड़ ले गए. चोरी की घटनाओं के बाद भी अब तक व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है. इससे विद्यालय भवन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

शौचालय तक जाने में डर, एक चापाकल भी खराबविद्यालय में पेयजल के लिए दो चापाकल हैं, लेकिन उनमें से एक लंबे समय से खराब पड़ा है. वहीं शौचालय के चारों ओर झाड़ियां और घास-फूस उग आई हैं. बरसात के दिनों में यहां सांप और बिच्छू निकलने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में छोटे बच्चों को शौचालय जाने में भी डर लगता है. नियमित साफ-सफाई नहीं होने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है.शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है परिसर

बाउंड्रीवाल नहीं होने का खामियाजा विद्यालय को हर दिन भुगतना पड़ता है. स्थानीय लोगों के अनुसार शाम होते ही विद्यालय परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है. यहां अक्सर शराब की खाली बोतलें और अन्य आपत्तिजनक सामान पड़े मिलते हैं. इससे विद्यालय की गरिमा प्रभावित होती है और बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं.

हर साल पौधे लगते हैं, लेकिन बच नहीं पातेविद्यालय परिसर में पर्याप्त खुली जगह है. हर वर्ष पौधरोपण भी किया जाता है, लेकिन सुरक्षा के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो जाते हैं. असामाजिक तत्व पौधों को नुकसान पहुंचा देते हैं. हरियाली बढ़ाने का प्रयास हर बार अधूरा रह जाता है.

प्रमुख समस्याएं

  • बरसात में कीचड़युक्त सड़क से स्कूल पहुंचने की मजबूरी. विद्यालय में बाउंड्रीवाल का अभाव.
  • टीन की खिड़कियां और तड़ित चालक चोरी. दो में से एक चापाकल खराब.
  • शौचालय के आसपास झाड़ियां, सांप-बिच्छू का खतरा. शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा.
  • पौधरोपण के बावजूद पौधों का संरक्षण नहीं. विद्यार्थियों की संख्या घटकर 58 रह गई.

निरीक्षण के बाद आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी : डीएसई

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, कामधेनु खटाल का निरीक्षण कर संबंधित समस्याओं का आकलन कराया जाएगा. जिन सुविधाओं का विकास विभागीय स्तर से संभव है, उनके लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

वहीं सड़क, बाउंड्रीवाल और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों और जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित किया जाएगा. बच्चों को सुरक्षित व बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है. विद्यालय परिसर की सुरक्षा, पेयजल, शौचालय की साफ-सफाई तथा अन्य कमियों को दूर करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Dharmanath kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >