250 वर्षों से आस्था का केंद्र है डूंगरी बाबा, नाग देवता से जुड़ी है रहस्यमयी मान्यता

भंडरो गांव का डूंगरी बाबा स्थान 250 वर्षों से ग्रामीणों की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां नाग देवता और प्राकृतिक जलस्रोत से जुड़ी अनोखी लोककथाएं पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं. ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें यहां अवश्य पूरी होती हैं, जिससे श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना के लिए आते हैं.

चास प्रखंड अंतर्गत भंडरो पंचायत के भंडरो गांव स्थित डूंगरी बाबा स्थान आज भी ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. करीब 200 से 250 वर्ष पुराना माने जाने वाले इस स्थल से नाग देवता, पहाड़ी और प्राकृतिक जलस्रोत से जुड़ी कई लोककथाएं ग्रामीणों के बीच पीढ़ियों से चली आ रही हैं. ग्रामीणों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गयी मन्नत पूरी होती है. इसी आस्था के कारण समय-समय पर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

विशाल नाग दिखने की कहानी से जुड़ी है मान्यता

ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार उनके पूर्वजों के समय डूंगरी बाबा स्थान पर करीब 80 फीट ऊंची पहाड़ी हुआ करती थी. इसी पहाड़ी पर एक बड़े पत्थर के समीप एक दिन विशाल नाग दिखाई देने की बात कही जाती है. ग्रामीणों के पहाड़ी पर पहुंचने के बाद नाग के नीचे की ओर चले जाने और कुछ देर बाद कुएं या तालाब में किसी बड़े जीव के कूदने जैसी तेज आवाज सुनाई देने की लोककथा प्रचलित है. इसी घटना के बाद ग्रामीणों के बीच यह मान्यता बनी कि यहां नाग देवता का वास है. हालांकि, यह पूरी कहानी स्थानीय लोकविश्वास पर आधारित है.

पहाड़ी ऊपर स्थित डूंगरी बाबा देवता व पत्थर | Prabhat Khabar Network

धान पकने के समय नाग की आकृति दिखने का दावा

डूंगरी बाबा स्थान से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार धान की फसल पकने के समय स्थल से करीब आधा किलोमीटर के दायरे में जंगल, खेत और तालाबों के आसपास नाग जैसी आकृति या परछाई दिखाई देती है. ग्रामीण इसे नाग देवता की उपस्थिति से जोड़कर देखते हैं. इसी तरह पहाड़ी के आसपास लगातार बारिश के बावजूद स्थायी जलधारा नहीं बनने को भी ग्रामीण पहाड़ी के नीचे किसी प्राकृतिक जलस्रोत से जोड़ते हैं.

मन्नत पूरी होने पर पूजा और बलि की परंपरा

ग्रामीणों के अनुसार डूंगरी बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मन्नत पूरी होने की मान्यता है. मन्नत पूरी होने के बाद यहां पूजा-अर्चना और पारंपरिक रूप से बलि देने की परंपरा भी बतायी जाती है. स्थानीय लोगों के बीच यह भी मान्यता है कि स्थल से पत्थर या जंगल की अन्य वस्तुएं बिना अनुमति ले जाना शुभ नहीं है. ग्रामीणों ने इससे जुड़े कुछ पुराने प्रसंग भी सुनाये, जिन्हें वे इस स्थान की धार्मिक शक्ति से जोड़कर देखते हैं.

पूर्वजों से चली आ रही आस्था आज भी कायम

बुजुर्ग इकांतो महतो, बोमकेश महतो, छोटेलाल महतो, शिक्षक परीक्षित महतो उर्फ पीएम सर, भैरव सिंहा, भवतरण सिंहा, प्रेमचंद महतो और पंचायत समिति सदस्य सपन महतो ने बताया कि उन्होंने डूंगरी बाबा स्थान की कथाएं अपने दादा-दादी और पूर्वजों से सुनी हैं. उनके अनुसार करीब दो से ढाई सौ वर्षों से यह स्थान ग्रामीणों की आस्था का केंद्र बना हुआ है.

आज भी यह स्थल जंगल, पहाड़ी और प्राकृतिक हरियाली से घिरा हुआ है. ग्रामीणों के लिए डूंगरी बाबा स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ उनकी लोकपरंपरा और पूर्वजों से जुड़ी विरासत का हिस्सा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थल से जुड़ी कथाएं और मान्यताएं वे आज भी नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं.


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By Brahm deo dubey

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