Coronavirus Pandemic: मैन-पावर की कटौती करेगा बोकारो स्टील प्लांट

Coronavirus Pandemic: bokaro steel plant to reduce man-power बोकारो : केंद्र व राज्य सरकार की एडवाइजरी के बाद कोरोना संक्रमण से जंग में सोशल डिस्टेंसिंग पर फोकस करते हुए बोकारो इस्पात संयंत्र भी बड़े कदम उठा सकता है. नॉन वर्क्स एरिया में रोस्टर प्लान के बाद अब संयंत्र के भीतर मैन पावर रिड्यूज करने की तैयारी है. इसके लिए प्रोड्क्शन डाउन पर मंथन चल रहा है. वैसे भी देश व राज्यों की सीमा सील करने व परिवहन सेवाएं ठप होने के बाद रॉ मटेरियल की कमी होने लगी है. इसलिए उत्पादन कटौती पर विचार हो रहा है.

सुनील तिवारी

बोकारो : केंद्र व राज्य सरकार की एडवाइजरी के बाद कोरोना संक्रमण से जंग में सोशल डिस्टेंसिंग पर फोकस करते हुए बोकारो इस्पात संयंत्र भी बड़े कदम उठा सकता है. नॉन वर्क्स एरिया में रोस्टर प्लान के बाद अब संयंत्र के भीतर मैन पावर रिड्यूज करने की तैयारी है. इसके लिए प्रोड्क्शन डाउन पर मंथन चल रहा है. वैसे भी देश व राज्यों की सीमा सील करने व परिवहन सेवाएं ठप होने के बाद रॉ मटेरियल की कमी होने लगी है. इसलिए उत्पादन कटौती पर विचार हो रहा है.

लगातार बदलते हालात को देखते हुए अब सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरियां) के माध्यम से कोरोना संक्रमण के चैनल को तोड़ने पर फोकस किया जा रहा है. बोकारो इस्पात संयंत्र में लगभग 20 हजार से अधिक कार्मिक व ठेका श्रमिक कुल चार शिफ्ट में कार्यरत हैं. इस लिहाज से यहां भी कोरोना संक्रमण का खतरा कम नहीं है. इसे देखते हुए सेल-बीएसएल प्रबंधन भी अब बड़े निर्णय लेने वाला है. हर पहलू पर चर्चा व लगातार मॉनीटरिंग हो रही है.

केंद्र सरकार व राज्य सरकार की एडवाइजरी पर अमल

सेल प्रबंधन ने कोयला, आयरन ओर सहित अन्य रॉ-मटेरियल की कमी व ट्रांसपोर्ट की सुचारु व्यवस्था नहीं होने की वजह से स्टॉक एक्सचेंज को उत्पादन में कटौती की विधिवत सूचना दे दी है. इससे यह संभावना और प्रबल हो गयी है कि बीएसएल-सेल में मैन पावर की कटौती होगा. विश्वव्यापी महामारी से निबटने के लिए बीएसएल सहित सेल के सभी यूनिटों में केंद्र सरकार व स्थानीय राज्य सरकार की एडवाइजरी पर अमल किया जा रहा है.

कोक सहित रॉ मटेरियल्स की सप्लाई हो रही प्रभावित

महामारी के रूप में फैल रहे कोरोना की वजह से देश व राज्यों की सीमाएं सील कर दी गयी हैं. इसका असर परिवहन सेवाओं पर भी पड़ा है. बोकारो स्टील प्लांट में आने वाले कोक सहित रॉ मटेरियल्स की सप्लाई भी इससे अब प्रभावित होने लगी है. हालांकि, बीएसएल के पास वर्तमान में रॉ मटेरियल का पर्याप्त स्टॉक है. लेकिन, यही स्थिति बनी रही, तो आगे दिक्कत आ सकती है. इसे देखते हुए सेल-बीएसएल प्रबंधन के माथे पर बल पड़ने लगा है.

प्रोडक्शन डाउन करना सेल-बीएसएल की विवशता

रॉ मटेरियल की कमी के चलते प्रोडक्शन डाउन करना सेल-बीएसएल की विवशता हो जायेगी. वहीं, फिलहाल की स्थिति में कर्मचारियों के बीच सामाजिक दूरियां लाने के लिए उनकी संख्या भी कम से कम करनी है. इसे देखते हुए उच्च प्रबंधन ने मंथन का दौर शुरू कर दिया है. जानकारी के अनुसार, वर्तमान व भविष्य की स्थिति को देखते हुए उच्च प्रबंधन सभी पहलुओं व विकल्पों पर विचार कर रहा है. इसके लिए बाकायदा एक उच्चस्तरीय कमेटी भी बनायी गयी है.

हर दिन उपजे हालात व एडवाइजरी की समीक्षा

बीएसएल संयंत्र प्रबंधन रॉ मटेरियल की कमी की स्थिति में एक-दो ब्लास्ट फर्नेस बंद कर सकता है. यही हाल मिल का भी हो सकता है. कोक-ओवन, पावर प्लांट को हर हाल में चालू रखना मजबूरी है. यह सारी व्यवस्थाएं हालात पर ही निर्भर करेंगी. इसके लिए एक कमेटी भी बनायी गयी है, जिसमें मान्यताप्राप्त यूनियन को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है. यह कमेटी देश व राज्य में हर दिन उपजे हालात व मिलने वाले एडवाइजरी पर संयंत्र के लिहाज से समीक्षा करेगी.

निजी व सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शामिल

कोरोना वायरस संकट के बीच घरेलू इस्पात कंपनियां अपना उत्पादन घटा सकती हैं. इसमें निजी व सार्वजनिक क्षेत्र दोनों की कंपनियां शामिल हैं. निजी क्षेत्र की जेएसडब्ल्यू स्टील पहले ही अपने संयंत्रों में उत्पादन घटाने का निर्णय कर चुकी है. देशव्यापी लॉकडाउन से इस्पात विनिर्माण में लगने वाले कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. उद्योग से जुड़े कर्मचारियों को अपने कार्यालय पहुंचने में दिक्कत आ रही है. इसलिए उत्पादन कटौती पर विचार किया जा रहा है.

जब तक उत्पादन करते रहेंगे, तब तक उत्पाद का ढेर

देशव्यापी लॉक डाउन में विनिर्माता जब तक उत्पादन करते रहेंगे, तब तक उत्पाद का ढेर लगता रहेगा. वह भट्ठियों को बंद नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनका लगातार काम करते रहना जरूरी है. लेकिन, वह उत्पादन को घटा सकते हैं. इस्पात कारखानों में लगी भट्ठियां 30 मीटर ऊंची होती हैं, जो विशेष तरह की ईंटों से बनी होती हैं. इसका तापमान 2,000 डिग्री सेल्सियस तक होता है. यदि इन्हें एक बार बंद कर दिया गया, तो इन्हें दोबारा गर्म करने में महीनों लग जायेंगे.

आवश्यक ड्यूटी वाले कर्मियों को निर्गत हुआ पास

बीएसएल ने आवश्यक ड्यूटी वाले कर्मियों को पास निर्गत किया है. यह पास 14 अप्रैल 2020 तक मान्य है. प्रबंधन की ओर से हर दिन प्रचार गाड़ी निकाली जा रही है, जो कोरोना के प्रति जागरूक कर रही है. सामान्य पाली में बीएसएल के विभिन्न कार्यालयों (प्लांट और अस्पताल को छोड़कर) में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को एक-एक दिन के अंतराल पर ऑफिस आने व शेष दिन अपने घरों से ही कार्य करने से संबंधित सर्कुलर भी निर्गत किया गया है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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