बोकारो: चास में गूंजे ‘आमद-ए-रसूल मरहबा’ के नारे, तिरंगे के साथ निकला भव्य जुलूसे मोहम्मदी

चास-बोकारो में ईद-मिलादुन्नबी के मौके पर अकीदतमंदों ने अमन और भाईचारे का संदेश देते हुए भव्य जुलूस निकाला। शहर में दिनभर जश्न का माहौल रहा।

बोकारो: "सरकार की आमद मरहबा, रसूल की आमद मरहबा..." के नारों और नात की गूंज से बुधवार को चास-बोकारो का माहौल खुशनुमा हो उठा. 1501वें सालाना जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अकीदत और उत्साह के साथ जुलूसे मोहम्मदी निकाला. जुलूस में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हुए. कई जगहों पर तिरंगा और मजहबी झंडे लहराते नजर आए. इस दौरान अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया गया.

मुस्लिम बहुल इलाकों में दिनभर रहा जश्न

ईद मिलादुन्नबी को लेकर मुस्लिम बहुल इलाकों में दिनभर जश्न का माहौल रहा. उकरीद, सिवनडीह, डुमरो, हैसाबातु, आजादनगर, मखदुमपुर, इस्लामपुर, सिजुआ, सेक्टर-09, चीराचास, झोपरो, बीलीडीह, भर्रा, अंसारी मोहल्ला, चास, सुल्तान नगर, कर्मागोडा, पिपराटांड़, महेशपुर, अगरडीह, बास्तेजी, रजानगर, पचौड़ा, इस्लामडीह, मोहनडीह, जाला, घटियारी और सोनाबाद समेत कई इलाकों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए. देर रात तक धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा.

सिवनडीह से उकरीद होते हुए नया मोड़ पहुंचा जुलूस

जुलूसे मोहम्मदी सिवनडीह से शुरू होकर उकरीद मजार शरीफ होते हुए नया मोड़ पहुंचा. इसके बाद जुलूस वापस उकरीद मजार शरीफ के समीप स्थित कव्वाली मैदान पहुंचा, जहां जुलूस जलसे में तब्दील हो गया.

जुलूस में शामिल लोग हाथों में इस्लामिक झंडे लिए हुए थे और "आमद-ए-रसूल मरहबा", "आमद-ए-दिलदार मरहबा", "हुजूर की आमद मरहबा" और "जश्ने ईद मिलादुन्नबी जिंदाबाद" के नारे लगा रहे थे. रास्ते में लोगों ने जुलूस का स्वागत किया.

सक्रिय समाजसेवी रिजवानुल होदा उर्फ कारी साहब ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूरी कायनात को इंसानियत, शांति और भाईचारे का पैगाम दिया. उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज में मोहब्बत और आपसी सौहार्द को मजबूत किया जा सकता है.

अंजुमन के अध्यक्ष हाजी कमरुल हक ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के प्रति आभार जताया.

सुरक्षा को लेकर पुलिस रही मुस्तैद

ईद मिलादुन्नबी को लेकर उकरीद मोड़ समेत विभिन्न मार्गों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. अलग-अलग थानों की पुलिस तैनात रही. जुलूस के दौरान पुलिस पदाधिकारी लगातार निगरानी करते रहे, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.

अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमिन ने किया आयोजन

जश्ने ईद मिलादुन्नबी का आयोजन अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमिन उकरीद के नेतृत्व में किया गया. आयोजन को सफल बनाने में सदर हाजी कमरुल हक, रिजवानुल होदा उर्फ कारी साहब, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के मंजुर अंसारी, हाजी साधन बाबू, नसरुल शाहबाज, रौशन शहजादा, डॉ. इरफान अंसारी, महासचिव हाजी हुसैन रिजवी, सचिव महबूब सुब्हानी, कोषाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार अंसारी, नसीम अख्तर, जाबीर हुसैन, फैयाजुद्दीन, इमामुल हक, अब्दुल मन्नान अंसारी, हाजी शम्स तबरेज अंसारी, मोहम्मद फारुक अंसारी, हसन इमाम, रेहान रब्बानी, रहमानी, अताउल्लाह, गुलाम ईरानी उर्फ मिट्ठू बाबू, ख्वाजा गुलाम, जरगीस अंसारी, उकरीद मुखिया अजहरुद्दीन अंसारी, हाजी शकील अहमद और शेख समीम समेत अन्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

सिवनडीह से मोहम्मद जाहिद अंसारी, महमूद आलम और रौनक अफरोज, आजादनगर से फैयाज अहमद, हैसाबातु से मुखिया बारीक अंसारी, मोबारक अंसारी और सिराजुद्दीन तथा भर्रा से अशफाक राही, सुमित और इलियास समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.


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By Dharmanath kumar

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