आजाद भारत का पहला पावर प्लांट BTPS: जब सिर्फ दीवारों की पेंटिंग के लिए पंडित नेहरू ने टाल दिया था उद्घाटन

Bokaro Thermal Power Station: बोकारो थर्मल (BTPS-A) प्लांट के ऐतिहासिक सफर और पंडित जवाहरलाल नेहरू के आगमन से जुड़े दिलचस्प किस्से. जानें कैसे शांति निकेतन की पेंटिंग के लिए बदला उद्घाटन का समय और माली को मिला कीमती रेजर.

बेरमो से राकेश वर्मा की रिपोर्ट

Bokaro Thermal Power Station, बोकारो: स्वतंत्र भारत के औद्योगिक इतिहास और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के झारखंड प्रेम की जब भी बात होती है, बेरमो कोयलांचल स्थित डीवीसी (DVC) का बोकारो ताप विद्युत केंद्र (BTPS) उसमें प्रमुखता से आता है. वर्ष 1952 में स्थापित यह प्लांट न केवल भारत का, बल्कि पूरे एशिया का पहला बहुउद्देशीय (Multipurpose) पावर प्लांट था. अमेरिका (USA) और पश्चिम जर्मनी के सहयोग से बने इस ऐतिहासिक प्लांट का उद्घाटन पंडित नेहरू ने 21 फरवरी 1953 को किया था. आज भी इस प्लांट के निर्माण और नेहरू जी के आगमन से जुड़े कई दिलचस्प किस्से बोकारो थर्मल के इतिहास में अमर हैं.

वॉल पेंटिंग के लिए नेहरू ने आगे बढ़ा दी थी उद्घाटन की तारीख

इस प्लांट से कला और संस्कृति का एक बेहद अनोखा रिश्ता जुड़ा है. कहा जाता है कि जब ‘BTPS-A’ प्लांट पूरी तरह बनकर तैयार हो गया, तब इसके भीतर बनाई जा रही खास वॉल पेंटिंग (दीवारों पर चित्रकारी) का काम समय पर पूरा नहीं हो सका था. पंडित नेहरू कला के इतने पारखी थे कि उन्होंने सिर्फ इस पेंटिंग को पूरा देखने के लिए उद्घाटन की तारीख को आगे बढ़ा दिया था. बोकारो थर्मल की निवासी और कोलकाता के शांति निकेतन से जुड़ीं कलाकार विनीता बंधोपाध्याय बताती हैं कि शांति निकेतन कला भवन के तत्कालीन निदेशक नंदलाल बोस ने इस पेंटिंग का ले-आउट तैयार किया था, जिसे सुरेंद्रनाथ कौर ने दीवारों पर उकेरा था. इन पेंटिंग्स में तत्कालीन एकीकृत बिहार-झारखंड की संस्कृति को दिखाया गया था. इसमें एक टोकरी लिए पुरुष और महिला का चित्र था, जिसका संदेश था ‘कर्म ही पूजा है’. वहीं, ‘पंच सखी’ नाम से पांच महिलाओं की एक बेहद आकर्षक पेंटिंग बनाई गई थी, जो यह दर्शाती थी कि इंसान को अंततः इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाना है. नेहरू जी ने इस कलाकृति की जमकर तारीफ की थी.

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जब माली को नेहरू ने दिया कीमती प्लेटिनम रेजर

पंडित नेहरू जब विशेष सैलून (ट्रेन) से बोकारो थर्मल आए, तो वे वहां के डीवीसी गेस्ट हाउस में ठहरे थे. वहां बोधी राम माली नाम के एक साधारण कर्मचारी बागवान के रूप में कार्यरत थे. गेस्ट हाउस के बगीचे में घूमने के दौरान नेहरू जी की नजर बोधी राम की लंबी दाढ़ी पर पड़ी. उन्होंने पास बुलाकर पूछा, “आपने इतनी दाढ़ी क्यों बढ़ा रखी है?” माली ने बेहद सादगी से जवाब दिया, “हुजूर, हमारे गांव में 10-15 दिनों में सिर्फ एक बार नाई (ठाकुर) आता है, इसलिए नियमित रूप से शेविंग नहीं कर पाता.” यह सुनते ही पंडित नेहरू भावुक हो गए. उन्होंने तुरंत अपना कीमती ‘मेड इन यूएसए’ (Made in USA) का प्लेटिनम रेजर बक्से समेत बोधी राम माली को तोहफे में दे दिया. नेहरू जी की दरियादिली की यह निशानी आज भी बोधी राम के परिवार ने एक अनमोल धरोहर की तरह सहेज कर रखी है.

एक साधारण स्टूल पर बैठकर दिया था भाषण

उद्घाटन के दिन नेहरू जी ने किसी भव्य मंच के बजाय प्लांट के अंदर ही एक साधारण से लकड़ी के स्टूल पर बैठकर हजारों मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों को संबोधित किया था. इस प्लांट में भारी मशीनरी का सारा काम अमेरिका की मशहूर ‘आरएल कूक’ (RL Cook) कंपनी ने किया था. पुराने लोग बताते हैं कि इस प्लांट की तकनीक इतनी बेहतरीन थी कि अगर एक मशीन खराब भी हो जाए, तो दूसरी मशीन से बिजली उत्पादन कभी ठप नहीं होता था. शुरुआत में तीन यूनिट वाले इस प्लांट की कुल क्षमता 172.5 मेगावाट थी (यूनिट 1: 57.5 MW, यूनिट 2: 67.5 MW, यूनिट 3: 57.5 MW). बाद में 75 मेगावाट की चौथी यूनिट भी जोड़ी गई. हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण मानकों को पूरा नहीं करने के कारण 17 जुलाई 2000 को इस ऐतिहासिक प्लांट को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया.

आज 500 मेगावाट का नया प्लांट

पुराने ‘A’ प्लांट के बंद होने के बाद, उसी स्थान पर भेल (BHEL) कंपनी द्वारा करीब 4,000 करोड़ रुपये की लागत से 500 मेगावाट क्षमता का एक नया अत्याधुनिक प्लांट बनाया गया, जिससे 22 फरवरी 2017 से बिजली उत्पादन सुचारू रूप से जारी है. लेकिन खास बात यह है कि डीवीसी ने आज तक उस पुराने ऐतिहासिक ‘ए’ प्लांट को ध्वस्त (Demolish) नहीं किया है. देश के पहले प्रधानमंत्री के कदमों और आजाद भारत के पहले औद्योगिक गौरव की गवाह बनी वह इमारत आज भी अपने गौरवशाली अतीत को समेटे सीना ताने खड़ी है.

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Published by: Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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