सुनील तिवारी, बोकाराे, भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को बोकारो का चिन्मय विद्यालय आज भी उनके मनोबल, प्रेरणा व जीवटता को ले कर याद करता है. अपने जीवन में हमेशा से बच्चों को खास तवज्जो देने वाले डॉ कलाम के सामने काल उस वक्त पराजित हो गया था, जब वो बच्चों से मिलने बोकारो आये. डॉ कलाम के जन्मदिन पर हर साल 15 अक्तूबर को विश्व छात्र दिवस मनाया जाता है. उद्देश्य शिक्षा के समान अवसरों को बढ़ावा देना, नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करना व छात्रों के योगदान को सम्मानित करना है. यह दिन डॉ कलाम के उस विश्वास की याद दिलाता है कि शिक्षा ना केवल व्यक्ति बल्कि पूरे समाज को बदल सकती है. ऐसे में डॉ कलाम की चर्चा समसामयिक है.
दुर्घटना के बाद भी पांव ठिठके नहीं, बच्चों के बीच पहुंचे पहुंचे
एक अक्तूबर 2001 को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम राजभवन-रांची से सड़क मार्ग से रांची एयरपोर्ट के लिए निकले. तत्कालीन मंत्री समरेश सिंह व जेबी तुबिद के साथ वह हेलीकॉप्टर से बोकारो के लिए प्रस्थान किये. चिन्मय विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लेना था. बोकारो में हेलीकॉप्टर के लैंड करने से पहले ही उसमें कुछ खराबी आ गयी. नतीजतन सात फीट ऊंचाई से गिर गया. इस दुर्घटना में डॉ कलाम व अन्य लोग बाल-बाल बच गये. इस दुर्घटना के बाद भी डॉ कलाम के पांव ठिठके नहीं. उन्होंने विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. बच्चों के सवालों के जवाब दिये. अगले दिन चंदनकियारी के बरमसिया होते हुए खेराबेड़ा चले गये.सड़क मार्ग से ही रांची लौटे
डॉ कलाम हेलीकॉप्टर खराब होने के कारण वह सड़क मार्ग से ही रांची लौटे. एयरपोर्ट से जहाज पकड़ कर दिल्ली चले गये. कुछ माह के 25 जुलाई 2002 को वह देश के राष्ट्रपति बने. छात्रों के प्रति उनके गहरे लगाव और प्रेरणादायी व्यक्तित्व ने उन्हें छात्रों के बीच “पीपुल्स प्रेसिडेंट ” के रूप में पहचान दिलायी. एक मई 2012 को डॉ कलाम फिर चिन्मय विद्यालय पहुंचे और चिन्मय सहित बोकारो जिले के अन्य स्कूलों के 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को संबोधित किया. बच्चों के बीच उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 42 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान के बावजूद बोकारो के दर्जनों स्कूलों के सैकड़ों छात्र कलाम का भाषण सुनने के लिए पहुंचे.मुश्किल से चार-पांच बच्चों ने शिक्षक बनने की इच्छा जतायी थी
01 मई 2012 को डॉ कलाम ने बच्चों को संबोधित करते हुए सवाल पूछा किह कौन-कौन शिक्षक बनना चाहता है. इसके जवाब में मुश्किल से चार-पांच बच्चों ने हाथ उठाया. इस पर डॉ कलाम चिंतित दिखे. चिन्मय विद्यालय स्कूल प्रबंध कमेटी के सचिव महेश त्रिपाठी ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने मुझसे इसका विशेष रूप से उल्लेख किया था. कहा कि यह ठीक नहीं है. डॉ कलाम ने श्री त्रिपाठी से कहा कि स्कूल में कुछ ऐसा किया जाये कि बच्चे शिक्षक भी बनने के प्रति जागरूक दिखें. अच्छे शिक्षक भी होने चाहिये. शिक्षक हीं कल का भविष्य तैयार करते हैं. इसलिये इस दिशा में विशेष पहल करने की जरूरत है. डॉ कलाम ने स्कूल में अच्छे शिक्षक की आवश्यकता पर बल दिया. आज भी श्री त्रिपाठी को वह बातचीत याद है.डॉ कलाम मानते थे कि हर छात्र में एक ‘चेंजमेकर’ बनने की क्षमता : महेश त्रिपाठी
स्कूल प्रबंध कमेटी के सचिव महेश त्रिपाठी ने मंगलवार को बताया कि डॉ कलाम स्कूल में 01 मई 2012 को आये थे. उसके पहले एक अक्तूबर 2001 को उनका स्कूल आना हुआ था. 2012 में जब वह स्कूल पहुंचे तब स्वागत के बाद वह मेरे हीं ऑफिस में बैठे. यहीं चाय-पानी-नाश्ता हुआ. काफी देर तक वह ऑफिस में बैठे थे. उनसे शिक्षा सहित कई बिंदुओं पर चर्चा की थी. बच्चों को संबोधन में शिक्षा की भूमिका, आत्मनिर्भरता व समाज सेवा की भावना प्रमुख थी. डॉ कलाम मानते थे कि हर छात्र में एक ‘चेंजमेकर’ बनने की क्षमता होती है, बस उसे सही दिशा व अवसर की आवश्यकता है.
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