Bokaro News : महिलाओं के खिलाफ हिंसा व दुर्व्यवहार को रोकने के लिए मिलकर आवाज उठाने की जरूरत : डॉ हेमलता

Bokaro News : महिला हिंसा उन्मूलन दिवस पर खास : बोकारो में हर साल 150-200 महिला हिंसा के मामले, महिलाएं अपने को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं, तो कहीं समाज का ताना-बाना टूट चुका है.

सुनील तिवारी, बोकारो, महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मुद्दा सिर्फ भारत केंद्रित नहीं है. यह पूरे विश्व की समस्या है. महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को केवल उनके अधिकारों के मुद्दे के रूप में देखा जाता है, जबकि ऐसा नहीं देखना चाहिए. यदि महिलाएं अपने को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं, तो कहीं ना कहीं समाज का ताना बाना टूट चुका है. यह एक मानवाधिकार का मुद्दा है. पुरुषों व महिलाओं को इस अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहिए. इसका समाधान ढूंढने के लिए एक साथ खड़े होना चाहिए. हमें विश्व स्तर पर हाथ मिलाकर मानवीय मूल्यों को पुन: स्थापित करने के लिए और महिलाओं के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार को रोकने के लिए मिलकर आवाज उठाने की आवश्यकता है. यह बातें झारखंड राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ हेमलता एस मोहन ने ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस’ पर प्रभात खबर से सोमवार को विशेष बातचीत में कही.

प्राचीनकाल से पुरुषों व महिलाओं को बराबर का दर्जा

डॉ हेमलता ने कहा कि भारतीय परंपरा में प्राचीनकाल से पुरुषों और महिलाओं को जीवन के सभी पहलुओं में बराबर का दर्जा देकर सम्मानित किया गया है. इस सम्मान को ईश्वर के अर्धनारीश्वर रूप में आधा पुरुष व आधा महिला दिखा कर निरूपित किया गया है. यह इस बात का प्रतीक है कि दोनों सृष्टि के संरक्षण व पोषण में बराबर के भागीदार हैं. यहां तक कि हमारे शरीर में कोशिकाओं के स्तर पर भी प्रत्येक जीन में पिता व मां दोनों की भागीदारी है. प्रत्येक व्यक्ति में उन दोनों ऊर्जाओं का संतुलन है. एक स्वस्थ प्रगतिशील समाज के लिए प्रत्येक व्यक्ति के भीतर इनका संतुलन भली भांति से बना रहना चाहिये. हमें महिलाओं का और उनकी भूमिका का सम्मान अवश्य ही करना चाहिए. तभी घर-परिवार, समाज व देश का समुचित विकास होगा.

करुणा की भावना जागृत करने की आवश्यकता

झारखंड की बौद्धिक राजधानी बोकारो में हर साल 150-200 महिला हिंसा के मामले आ रहे हैं. मतलब, हर माह 15-20 मामले दर्ज हो रहे हैं. यहां उल्लेख्नीय है कि कई महिला हिंसा के मामले थाना तक पहुंच नहीं पाते हैं. कई मामले स्थानीय स्तर पर सुलझा दिये जाते हैं. डॉ हेमलता ने कहा कि बोकारो सहित महानगरों में बढ़ती महिला हिंसा की संख्या एक चिंता का विषय है. इसके समाधान के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है. पुरुषों व महिलाओं में करुणा की भावना जागृत करने की आवश्यकता है. सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण कारक सरकार की प्रभावशीलता है. अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही का कानून लागू होना आवश्यक है. यहां उल्लेखनीय है कि समाज में महिलाओं को सम्मान व बराबरी का दर्जा दिलाने की मुहिम की डॉ हेमलता अगुआ रही हैं.

महिलाओं को जागरूक करने के लिए हर साल ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस’

दुनियाभर में महिला हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है. दुनिया भर में महिलाओं पर हो रही हिंसा को रोकने और महिलाओं को जागरूक करने के लिए हर साल 25 नवंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस’ मनाया जाता है. 25 नवंबर 1960 में पैट्रिया मर्सिडीज, मारिया अर्जेटीना और एंटोनियो मारिया टेरेसा द्वारा डोमिनिक शासक रैफेल टुजिलो की तानाशाही का विरोध किया गया था. तब उस शासक के आदेशानुसार तीनों बहनों को बेरहमी से मरवा दिया गया. तब से 1981 में लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई नारीवादी एनकेंट्रोस के कार्यकर्ताओं ने 25 नवंबर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मुकाबला करने व तीनों बहनों की पुण्यतिथि के रूप में मनाने का आदेश दिया. 17 दिसंबर 1999 को संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अधिकारिक प्रस्ताव के रूप में अपनाया. उद्देश्य था : महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकना.

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