Bokaro News : पूर्व साझीदार व उसकी पत्नी को फंसाने के लिए टैक्स कंसल्टेंट ने चचेरे भाई से खुद पर करायी थी फायरिंग

Bokaro News : 23 अगस्त की देर रात सेक्टर 12 थाना क्षेत्र के डी-1165 के पास दागी गयी थीं दो गोलियां, एसआइटी ने 48 घंटे में किया मामले का खुलासा, सीसीटीवी फुटेज में नहीं मिला कोई बाइक सवार.

बोकारो, सेक्टर 12 डी-1165 निवासी टैक्स कंसल्टेंट अभिषेक प्रताप सिंह ने सेक्टर वन निवासी पूर्व पार्टनर चंद्रभूषण ओझा व उनकी पत्नी को फंसाने की नियत से खुद पर रविवार की रात अपने चचेरे भाई से गोली चलवायी थी. इसके बाद खुद ही झूठी कहानी बनाकर सेक्टर 12 थाना को बताया था कि बाइक सवार दो अपराधियों ने उस पर गोली चलायी है. इसमें बाल-बाल बचे हैं. मामला दर्ज करा कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी. 48 घंटे में ही एसपी हरविंदर सिंह की गठित एसआइटी ने मामले का उद्भेदन कर दिया.

गिरफ्तार आरोपियों को भेजा गया जेल

कैंप दो स्थित एसपी कार्यालय में मंगलवार को एसपी ने पत्रकारों को बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों में अभिषेक प्रताप सिह व उसका चचेरा भाई मंधीर कुमार सिंह शामिल है. मंगलवार को दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. इनके पास से एक लोडेड देशी पिस्तौल 7.62 एमएम, 19 जिंदा गोली 7.62 एमएम, एक खोखा 7.62 एमएम, घटना में प्रयुक्त एक काला रंग का मोटरसाइकिल व दो मोबाइल जब्त किया है. दोनों अभियुक्तों के विरूद्ध सेक्टर 12 थाना में आर्म्स एक्ट के तहत (कांड संख्या 115/25, 26 अगस्त 2025) मामला दर्ज किया गया है.

घटनास्थल पर मिला था एक खोखा

एसपी ने कहा कि 23 अगस्त को वादी अभिषेक प्रताप सिंह ने पुलिस को सूचना दी कि रात्रि को आवास से उतरते वक्त एक बाइक सवार हेलमेट पहने व्यक्ति ने जान मारने की नियत से फायरिंग की. किसी तरह जान बची. सूचना पर सिटी डीएसपी आलोक रंजन व सेक्टर 12 इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र सिंह टीम के साथ स्थल पर पहुंचे. जांच के दौरान घटनास्थल से एक 7.62 एमएम बोर का खाली खोखा बरामद किया गया. अभिषेक ने लिखित आवेदन में आरोप लगाया कि पूर्व के लेनदेन को लेकर पुराने पार्टनर चंद्रभूषण ओझा व उनकी पत्नी अर्चना ओझा द्वारा गोली चलवायी गयी है. थाना में 24 अगस्त को कांड 114/25 अंकित कर जांच शुरू की गयी.

कड़ाई से पूछताछ में चंद्रमोहन को फंसाने की बात कबूली

श्री सिंह ने कहा कि अनुसंधान के दौरान अभिषेक की गतिविधि संदिग्ध लगी. जांच-पड़ताल के दौरान दर्जनों सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध बाइक सवार भी नहीं दिखा. कड़ाई से पूछताछ में बताया कि अभिषेक ने चचेरे भाई के साथ योजना बनाकर चंद्रमोहन व उनकी पत्नी को केस में फंसाने के नियत से खुद पर गोली चलवायी.

टीम में ये थे शामिल

एसपी ने कहा कि सिटी डीएसपी के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया गया था. इसमें सेक्टर 12 थाना प्रभारी इंस्पेक्टर, सेक्टर चार थाना इंस्पेक्टर संजय कुमार, बीएस सिटी थाना इंस्पेक्टर सुदामा कुमार दास, पुअनि कांति बिलास, पुअनि दिलीप टुडू, सअनि मिथिलेश कुमार दूबे, असनि इंदर कुमार पासवान, आरक्षी योगेंद्र कुमार रजक, प्रफुल्ल कुमार मंडल, सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, रंजीत महतो, चालक आरक्षी सुधीर हेंब्रम, सत्येंद्र प्रसाद को शामिल किया गया.

क्या था पूरा मामला

अभिषेक प्रताप सिंह से टैक्स कंसल्टेंट के पेशे से जुड़े है. 23 अगस्त की देर रात को अभिषेक अपने आवास में सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे. उसी वक्त बाइक पर सवार दो अपराधी वहां पहुंचे. सीढ़ी से उतरते अभिषेक पर दो राउंड फायर कर दी. इसके बाद मौके से फरार हो गये. अभिषेक फायरिंग में बच गये. फायरिंग के बाद अभिषेक गोली का दो खोखा उठाकर सेक्टर 12 थाना पहुंचे. थाना में शिकायत दर्ज करायी. दर्ज मामले में अभिषेक ने कहा कि पूर्व साथी चंद्रभूषण ओझा के साथ मिलकर टैक्स कंसल्टेंट काम करते थे. इसी बीच अभिषेक से चंद्रभूषण ने कुछ आर्थिक मदद ली. इसके बाद चंद्रभूषण ने लोन पर एक कार खरीदी. लोन का गारंटर अभिषेक को बनाया. लेकिन कार का लोन चंद्रभूषण ने चुकाना बंद कर दिया. चंद्रभूषण ना तो बैंक का लोन चुका रहा था और न अभिषेक से लिये आर्थिक मदद को वापस कर रहा था. साथ ही टैक्स कंसल्टेंट के धंधे से अलग हो गया था. अभिषेक बार-बार रुपये को लेकर तगादा करता था. अभिषेक ने पुलिस को दिये आवेदन में बताया था कि उस पर फायरिंग की घटना में चंद्रभूषण व उसकी पत्नी का हाथ है.

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