Bokaro News : सिदो कान्हू के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता

Bokaro News : जिले में जगह-जगह मनाया गया हूल दिवस, लोगों ने शहीदों को किया नमन, बोले उमाकांत रजक : शहीदों का बलिदान आज भी हमें प्रेरणा देता है और पूरा देश उनके शौर्य को याद करता है.

चास, झामुमो ने चास आइटीआइ मोड़ पर सोमवार को सिदो-कान्हू हूल दिवस सादगी और श्रद्धापूर्वक मनाया गया. अध्यक्षता चास नगर अध्यक्ष प्रमोद तापड़िया व संचालन चास प्रखंड अध्यक्ष राम दयाल सिंह ने किया. झामुमो नेता व कार्यकर्ताओं ने सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. मुख्य अतिथि चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक ने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले वीर शहीदों सिदो व कान्हू के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उनका बलिदान आज भी हमें प्रेरणा देता है और पूरा देश उनके शौर्य को याद करता है. झामुमो के जिला अध्यक्ष रतनलाल मांझी ने कहा कि वीर सिदो-कान्हू ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था. बोकारो महानगर के अध्यक्ष मंटू यादव ने कहा सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो जैसे वीर शहीदों ने अंग्रेजों द्वारा शोषित और पीड़ित झारखंडी लोगों के लिए अप्रतिम संघर्ष किया. धन्यवाद ज्ञापन चास नगर सचिव भागीरथ शर्मा ने किया. ये थे मौजूद कार्यक्रम में केंद्रीय सदस्य संतोष रजवार, महानगर उपाध्यक्ष संजय केजरीवाल, विजय रजवार, हीरालाल मांझी, जयनारायण महतो, अशोक मुर्मू, मोहन मुर्मू, हसन इमाम, मनोज महतो, मुक्तेश्वर महतो ,मिथुन मंडल ,फिरदौस अंसारी, पंकज जायसवाल ,आकाश टुडू , आलोक सिंह ,नैयर जमाल, फैयाज अंसारी, राकेश सिन्हा ,बम पांडे, अभिषेक पांडेय ,सदानंद गोप ,राज कुमार सोरेन, गणेश श्रीवास्तव सहित अन्य झामुमो कार्यकर्ता उपस्थित थे. जैनामोड़ में झामुमो ने मनाया हूल दिवस जैनामोड़, जरीडीह झामुमो प्रखंड कमेटी के नेतृत्व में सोमवार को जैनामोड़ में हूल दिवस मनाया गया. प्रखंड अध्यक्ष पंकज मरांडी के नेतृत्व में फोरलेन से जुलूस निकाल कर सिदो कान्हू चौक पर माल्यार्पण किया गया. आदिवासी विकास मंच के अध्यक्ष अमित सोरेन ने कहा कि आदिवासी संस्कृति बहुत पुरानी है. जल, जंगल व जमीन को बचाने के लिए सिदो-कान्दू, चांद भैरव के नेतृत्व में 30 जून 1855 को लगभग 30 हजार संतालों ने अपनी कुर्बानी दी थी. प्रमुख देवनारायण जायसवाल ने कहा कि अंग्रेजों के विरोध में भोगनाडीह में सिदो कान्हू के नेतृत्व में हजारों संतालों ने लड़ाई लड़कर अपनी कुर्बानी दी थी. कार्यक्रम में जिला कोषाध्यक्ष पंकज जयसवाल, अजय किस्कू, सोमर मुंडा, रामा मांझी, अंबिका देवी, अतुल रजवार, सोहन मुर्मू, संजय मुर्मू, राजेश मुर्मू, सूरजदेव हांसदा, तुलसी मरांडी, बाबूराम मांझी, रंजीत मुर्मू, राजाराम सोरेन, आजाद अंसारी, त्रिलोचन मरांडी, अनिल मरांडी, लखन सोरेन, जंयत महतो, बिंदेश्वर मांझी, अमित दिगार, बाबूलाल हांसदा, शंकर मरांडी, जगदीश मांझी, सुरेंद्र मुर्मू आदि शामिल थे.

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