Bokaro News : मधुकरपुर उच्च विद्यालय में शिक्षकों की कमी, बच्चों का भविष्य अधर में

Bokaro News : ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों को दी सूचना, पर नहीं की गयी पहल.

दीपक सवाल, कसमार, कसमार प्रखंड के मधुकरपुर गांव का उत्क्रमित उच्च विद्यालय इन दिनों शिक्षक संकट से गुजर रहा है. विद्यालय में तीनों स्तर (प्राथमिक, मध्य और उच्च) पर सैकड़ों बच्चे नामांकित हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है. स्थिति यह है कि बच्चे रोज स्कूल, तो पहुंचते हैं, पर पढ़ाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभायी जा रही है. विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक लगभग 100 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इनके लिए एक सरकारी और पांच सहायक (पारा) शिक्षक कार्यरत हैं. प्राथमिक स्तर की पढ़ाई किसी तरह चल रही है, लेकिन मध्य विद्यालय यानी कक्षा छह से आठ में हालात बेहद चिंताजनक हैं. यहां एक भी शिक्षक पदस्थापित नहीं है, जबकि इन कक्षाओं में करीब 160 बच्चे अध्ययनरत हैं. ऐसे में प्राथमिक वर्ग के शिक्षकों को ही इन बच्चों की पढ़ाई जैसे-तैसे संभालनी पड़ रही है. नतीजा यह है कि छोटे बच्चों और मध्य वर्ग, दोनों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है.

उच्च विद्यालय में भी शिक्षकों का टोटा

कक्षा नौवीं और 10वीं में करीब 158 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए केवल दो शिक्षक कुणाल किशोर और सुबल रजवार ही शेष रह गये हैं. हाल ही में विद्यालय की एकमात्र गृह विज्ञान शिक्षिका का स्थानांतरण हो गया, जिससे स्थिति और अधिक खराब हो गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की कमी थी, ऐसे में तबादला पूरी तरह अनुचित है.

अभिभावक चिंतित

कई अभिभावकों ने चिंता जतायी कि सरकारी विद्यालय में पढ़ाई ठप होने के कारण अब वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने पर विचार कर रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षकों की कमी की सूचना कई बार विभागीय अधिकारियों को दी गयी, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया. लोगों ने मांग की है कि कक्षा छह से 10 तक के लिए स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति शीघ्र की जाये. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जहां शिक्षा सुधार की बात करती है, वहीं मधुकरपुर जैसे गांवों के विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बच्चों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

स्कूल जानेवाला रास्ता भी असुरक्षित

स्थानीय समाजसेवी धनंजय स्वर्णकार ने कहा कि विद्यालय तक जाने वाला रास्ता गंदा और असुरक्षित है. मार्ग के एक ओर गहरा तालाब होने के कारण अभिभावक छोटे बच्चों को निश्चिंत होकर स्कूल नहीं भेज पाते. यदि अंचल अधिकारी इस स्थल की नापी कराकर सड़क का निर्माण करवायें, तो ना केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि तालाब की ओर ऊंची दीवार या जाल लगाकर बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है.

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