तलगड़िया, स्वतंत्रता सेनानी व पाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिवंगत हरदयाल शर्मा का जन्म 21 दिसम्बर 1903 को बोकारो जिले के चिकसिया गांव में हुआ था. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभायी और बाद में पाड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए विधायक के रूप में जनसेवा की. वर्ष 1952 के पाड़ा विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में हरदयाल शर्मा काशीपुर पंचकोट स्टेट के महाराजा शंकरी प्रसाद सिंह देव के पुत्र भुवनेश्वरी प्रसाद सिंह देव को पराजित कर विधायक बने. अपने कार्यकाल में उन्होंने सर्वप्रथम शिक्षा के प्रसार पर विशेष जोर दिया. इसी उद्देश्य से उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति, मौजा चिकसिया में लगभग तीन एकड़ भूमि मध्य विद्यालय की स्थापना के लिए दानस्वरूप प्रदान की, ताकि क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके. इसके अतिरिक्त हरदयाल शर्मा ने लगभग पांच एकड़ भूमि पर अपने पिता दिवंगत कार्तिक चंद्र शर्मा की स्मृति में कार्तिक चंद्र शर्मा उच्च विद्यालय की स्थापना की. इसका उद्घाटन बिहार सरकार के प्रथम तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह ने किया. इसके अलावा चास-चंदनकियारी व पाड़ा क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांवों में कई उच्च, मध्य व प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की. चास-चंदनकियारी व पाड़ा को बिहार में रखने के लिए एक वृहद आंदोलन का नेतृत्व किया फलस्वरूप पश्चिम बंगाल के प्रथम मुख्यमंत्री विधान चंद्र राय व बिहार के मुख्यमंत्री डॉ श्री कृष्ण सिंह के बीच कोलकाता में राज्य परिसीमन निर्धारण की वार्ता में पाड़ा को पश्चिम बंगाल का हिस्सा तथा चास-चंदनकियारी को बिहार का हिस्सा बनने पर सहमति बनी. चास के हरिमंदिर में बल्ब जलाकर क्षेत्र में बिजली व्यवस्था की शुरुआत की थी. क्षेत्र के आर्थिक पिछड़ापन को दूर करने के लिए कार्य किये. उनका निधन पांच मार्च 1980 को हुआ. उनके सम्मान में 2010 को हरदयाल बाबू विकास मंच की स्थापना हुई. जिसके संस्थापक अध्यक्ष जगन्नाथ रजवार बने, मंच के प्रयासों से 21 दिसंबर 2017 को दिवंगत हरदयाल शर्मा की प्रतिमा की गयी. जिसका नाम हरदयाल शर्मा चौक चंदनकियारी किया गया.
Bokaro News : हरदयाल शर्मा का क्षेत्र के विकास में अहम योगदान

Bokaro News : हरदयाल शर्मा का क्षेत्र के विकास में अहम योगदान
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Bokaro News : पांच मार्च को पुण्यतिथि पर विशेष : बोकारो- चंदनकियारी के प्रखर स्वतंत्रता सेनानी थे हरदयाल शर्मा, चास-चंदनकियारी क्षेत्र में कई विद्यालयों की स्थापना की.