Bokaro News : मोहन कुमार मंगलम स्टेडियम की स्वर्ण जयंती मनी, खिलाड़ी व एथलीट हुए सम्मानित

Bokaro News : स्टेडियम में पसीना बहा कर कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनायी है पहचान, फुटबॉल, हैंडबॉल, तीरंदाजी, हॉकी, एथलेटिक सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं.

बोकारो, इस्पात नगरी बोकारो के सेक्टर चार में स्थित मोहन कुमार मंगलम स्टेडियम (एमकेएम स्टेडियम) ने स्थापना के पांच दशक पूरे कर स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश किया है. यहां से प्रशिक्षण हासिल कर कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है. शुक्रवार को स्टेडियम की स्वर्ण जयंती के अवसर पर समारोह आयोजित किया गया. अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन) राजश्री बनर्जी ने गुब्बारा उड़ाकर कार्यक्रम की शुरुआत की. इस दौरान कई पुराने खिलाड़ियों व एथलीटों को सम्मानित किया गया.

तत्कालीन स्टील मंत्री मोहन कुमार मंगलम के नाम पर हुआ था स्टेडियम का नामकरण :

स्टेडियम की नींव बोकारो स्टील सिटी के विकास के प्रारंभिक वर्षों में रखी गयी थी. तत्कालीन केंद्रीय इस्पात और खान मंत्री मोहन कुमार मंगलम के नाम पर समर्पित यह स्टेडियम शहर को ना केवल औद्योगिक नगर बल्कि खेल के क्षेत्र में एक पहचान देने के उद्देश्य से बनाया गया था. इसका निर्माण बीएसएल कर्मियों व उनके बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिये किया गया था. यह मुख्य रूप से एक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक विशाल फुटबॉल स्टेडियम है. 1970 के दशक के मध्य में बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) की ओर से निर्मित यह विशाल खेल परिसर, जो लगभग 40,000 दर्शकों की क्षमता रखता है, केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि बोकारो के तकनीकी और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का जीवंत प्रतीक रहा है.

खिलाड़ियों के लिए कई सुविधाएं हैं उपलब्ध

स्टेडियम में एथलेटिक्स के लिए 400 मीटर का ट्रैक, तीरंदाजी व अन्य मैदानी खेलों के लिए स्थान मौजूद है. परिसर में खिलाड़ियों के लिए ड्रेसिंग रूम, वीआइपी गैलरी, प्रेस बॉक्स व विभिन्न खेल अकादमियों के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. एमकेएम स्टेडियम हमेशा से बड़े आयोजनों का केंद्र रहा है. यहां बोकारो स्टील फुटबॉल कप टूर्नामेंट का आयोजन होता था, जिसकी विजेता टीम 1978-79 में बोकारो स्टील लिमिटेड (बीएसएल) की टीम थी. वह जीत आज भी बीएसएल कर्मियों को याद है.

1980 में कॉसमॉस क्लब-रूस व बीएसएफ के बीच हुआ था फुटबॉल मैच

1980 में स्टेडियम ने एक यादगार मैच की मेजबानी की, जो कॉसमॉस क्लब-रूस व सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के बीच हुआ. आयोजन बीएसएल के तत्वावधान में हुआ. मैच बोकारो को अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक रहा. पांच दशकों में यह असंख्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभाओं का जन्मस्थान व प्रशिक्षण केंद्र रहा है. ओलंपियन व अर्जुन अवॉर्ड विजेता स्वर्गीय पीटर थंगराज (जो एशिया के शताब्दी 1900-2000, के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में एक थे) जैसे विश्व विख्यात खिलाड़ियों का नाम इससे जुड़ा है.

प्रतिमा कुमारी, जे बर्मन, राजेंद्र प्रसाद व आरबी साह ने बोकारो के गौरव को बढ़ाया

स्टेडियम में प्रशिक्षित अंतर्राष्ट्रीय वेटलिफ्टर और कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता प्रतिमा कुमारी (वर्तमान में सीआरपीएफ में सेकंड इन कमांड) व अंतर्राष्ट्रीय पावरलिफ्टर और ऐशियन बेंचप्रेस चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता जे बर्मन (बीएसएल से सेवानिवृत्त) ने बोकारो के गौरव को बढ़ाया है. अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक राजेंद्र प्रसाद व आरबी साह (सेवानिवृत्त बीएसएल) ने भी खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय मार्गदर्शन प्रदान किया है. स्टेडियम ने कई खिलाड़ियों को सम्मानजनक कॅरिअर का अवसर दिया है.

खेल को बढ़ावा देना था उद्देश्य

बीएसएल प्रबंधन ने खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर के सेक्टर चार में 1972 में फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू कराया, जो 1975 में पूरा हुआ. बीएसएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक केसी खन्ना ने 21 नवंबर 1975 को इस स्टेडियम का उद्घाटन किया. यहां ऑल इंडिया बोकारो स्टील कप फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता रहा है. स्टेडियम परिसर में हैंडबॉल व एथलेटिक के खिलाड़ी वर्षभर प्रशिक्षण हासिल करते हैं. यहां सेल फुटबॉल एकेडमी के खिलाड़ी भी हर रोज प्रशिक्षण लेते हैं.

1972 में आये थे मोहन मंगलम, कोक अवन बैटरी का किया था उद्घाटन

इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में मोहन कुमार मंगलम स्टील मंत्री थे. वह 1972 में बोकारो स्टील प्लांट आये थे. कोक अवन बैटरी संख्या चार का उद्घाटन किया था. नयी दिल्ली में 30 मई 1973 में एयर क्रैश में उनकी मृत्यु हुई. वह पांडिचेरी के सांसद थे. उनके नाम पर हीं स्टेडियम का नाम रखा गया.

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