बोकारो, बोकारो स्टील प्लांट व अखिल भारतीय चेतना दर्पण के संयुक्त तत्वावधान में बोकारो इस्पात पुस्तकालय- सेक्टर पांच में साहित्यिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि महाप्रबंधक (क्रय) नीरजा शतदल उपस्थित रहीं. विशिष्ट अतिथियों में महाप्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन) चौधरी रत्नेश कुमार सुधांशु, विहंगम योग के अंतरराष्ट्रीय प्रचारक सुखनंदर सिंह ‘सदय’, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष व वरिष्ठ कवि जगन्नाथ शाही सहित कई जाने-माने कवि व साहित्यकार उपस्थित रहे.
समाज से जोड़ने का सशक्त माध्यम है साहित्य : सुखनंदन
नीरजा शतदल ने कविता का सस्वर पाठ करते हुए कहा कि साहित्य सृजन के माध्यम से व्यक्ति के अंतर्मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो समाज एवं राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. चौधरी रत्नेश कुमार सुधांशु ने कहा कि रचनाकारों को ऐसे साहित्यिक मंचों के माध्यम से सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए, जिससे नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिले और साहित्यिक परंपरा और अधिक सुदृढ़ हो. सुखनंदन सिंह ने ‘झारखंड अभिनंदन’ का सस्वर पाठ करते हुए साहित्य को समाज से जोड़ने का सशक्त माध्यम बताया. अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि जगन्नाथ शाही ने अपनी कविता राजघाट पर सोए गांधी, जागो आज बेचैन धरा है का पाठ किया.
व्याकरण के गहन अध्ययन व मंच अनुशासन के पालन पर बल दें साहित्यकार
श्री शाही ने कहा कि बीएसएल द्वारा लेखन व पठन-पाठन से जुड़े रचनाकारों को एक सार्थक मंच प्रदान किया जा रहा है. साथ ही, उन्होंने साहित्यकारों से व्याकरण के गहन अध्ययन व मंच अनुशासन के पालन पर विशेष बल दिया. डॉ परमेश्वर भारती, डॉ मनोज कुमार सिंह, डॉ सुबोध कुमार शैलांश, प्रभा मोहन नायर, काजल भालोटिया, अमृता शर्मा, लव कुमार, रेणुका सिन्हा, रिंकू गिरि, संजू गिरि, राबिया शेख, दीप्ति झा, डॉ आशा पुष्प, गीता कुमारी गुस्ताख, करुणा कलिका, ज्योतिर्मय डे राणा, ब्रह्मानंद गोस्वामी, डीएन सिंह, आर. पी. वर्मा, सचिन बृजनाथ, अरुण पाठक एवं डॉ. नरेंद्र कुमार राय सहित कवि गोष्ठी के दौरान अनेक कवियों व साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया.
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