Bokaro News : मानस का अयोध्या कांड प्रेम, त्याग व तपस्या की मिशाल : स्वामी अद्वैतानंद

Bokaro News : चिन्मय मिशन के तत्वावधान में चिन्मय विद्यालय बोकारो के तपोवन सभागार में छह दिवसीय ज्ञान यज्ञ शुरू, माहौल हुआ भक्तिमय.

बोकारो, त्याग से बड़ा कोई अमृत तत्व नहीं है. इसका सुंदर मूर्त रूप यदि कहीं देखना हो तो वह है श्री रामचरितमानस का अयोध्या कांड. इसमें भगवान श्रीराम पिता के वचन पालन के लिए राज का त्याग कर 14 वर्ष के कठिन वनवासी जीवन का व्रत लेते हैं. वन के कांटों भरे पथ पर विचरण करने के लिए अयोध्या का त्याग करते हैं. जनक नंदनी राजकुमारी सीता पतिव्रत्य धर्म की उच्च प्रतिष्ठा को स्थापित करती हुई राज-सुख का त्याग कर अपने पति की अनुगामिनी बनती है. यह बातें चिन्मय मिशन के वरीय आचार्य स्वामी अद्वैतानंद सरस्वती ने कही. श्री सरस्वती चिन्मय विद्यालय बोकारो के तपोवन सभागार में गुरुवार की शाम चिन्मय मिशन बोकारो के तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय ज्ञान-यज्ञ के पहले दिन कथा का वाचन कर रहे थे.

लोभ, मोह, ईष्या व कटुता भरे संसार में अयोध्या कांड का अनुशीलन आवश्यक

स्वामी अद्वैतानंद ने कहा कि लक्ष्मण जी अपने भाई व आराध्य की सेवा के लिए राजमहल का त्याग करते हैं. धर्मात्मा भरत धर्म की प्रतिष्ठा के लिए राजसिंहासन पर साक्षात धर्म-स्वरुप अपने बड़े भाई का अधिकार है, इस धर्म की प्रतिष्ठा के लिए सिंहासन का त्याग कर 14 वर्ष तक नंदीग्राम में तपस्वी जीवन जीते हैं. आज के लोभ, मोह, ईष्या, द्वेष व कटुता भरे संसार में त्याग, बलिदान, प्रेम, आदर्श भातृत्व प्रेम, मातृ-पितृ भक्ति व तपस्या का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए अयोध्या कांड का अनुशीलन अति आवश्यक है.

श्रीराम व श्रीकृष्ण के चरित्र हीं राष्ट्र की संस्कृति के आधार : बीके तिवारी

मुख्य अतिथि बोकारो स्टील प्लांट के निदेशक प्रभारी बीके तिवारी ने कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्र ही तो हमारे राष्ट्र की संस्कृति के आधार हैं. अयोध्या कांड के प्रसंग, तो आज के तनावपूर्ण जीवन में काफी उपयोगी है. अयोध्या कांड से ही हमें प्रेरणा मिलती है कि कभी-कभी अप्रिय निर्णय लेना समाज, राष्ट्र व व्यक्ति के हित के लिए काफी उपयोगी होता है. उन्होंने कहा कि केकई श्रीराम को कौशल्या से अधिक स्नेह करती थी. अपने पुत्र भरत से अधिक प्रेम श्री राम से करती थी. लेकिन, उनका एक निर्णय श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास व भरत् को राजगद्दी ने उन्हें जीवन भर के लिए कलंकिनी बना दिया. श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास ने हीं उनके मर्यादा पुरुषोत्तम रूप को निखारा. भगवान श्रीराम आदर्श समाज के मार्गदर्शक है. मुख्य अतिथि बीके तिवारी के साथ विशिष्ट अतिथि राजश्री बनर्जी अधिशासी निदेशक, मानव संसाधन विभाग बीएसएल व अन्य ने दीप जला शुरुआत की. हरिहर राउत-सचिव, चिन्मय मिशन ने स्वागत किया.

श्रीमद्भगवद्गीता के पुरुषोत्तम योग का पाठ, भजन व श्लोकों की प्रस्तुति दी

नौनिहालों ने श्रीमद्भगवद्गीता के पुरुषोत्तम योग का पाठ किया. संगीत विभाग ने भजन व श्लोकों की प्रस्तुति दी गयी. चिन्मय मिशन बोकारो आवासीय आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंद सरस्वती, विद्यालय अध्यक्ष बिश्वरूप मुखोपाध्याय, सचिव महेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष आरएन मल्लिक, प्राचार्य सूरज शर्मा, डीएवी चार के प्राचार्य एसके मिश्र, उप-प्राचार्य नरमेंद्र कुमार व हेडमास्टर गोपाल चंद्र मुंशी सहित श्रद्धालु उपस्थित थे. मंच संचालन स्कूल की अधिशासी मानव संसाधन सुप्रिया चौधरी व शिक्षिका सोनाली गुप्ता ने किया.

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