Bokaro News : संचिकाओं में अटकी बोकारो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर योजना

Bokaro News : बोकारो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर योजना पांच साल से संचिकाओं में अटकी है.

बोकारो में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की योजना को लेकर पांच साल से केंद्र और राज्य सरकार के बीच फेंका-फेंकी वाला खेल चल रहा है. योजना में अब जमीन को लेकर सहमति नहीं बन रही है. कई बैठकों के बाद भी राज्य व केंद्र सरकार की पीएसयू सेल के बीच जमीन की दर को लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है. इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की संबंधित इकाई एनआइसीडीसी को अब मध्यस्थता के लिए कहा गया है.

जानकारी के मुताबिक सेल की इकाई बाजार दर पर जमीन देने की बात कर रही है, जो वर्तमान में 13 लाख रुपया प्रति डिसमिल के करीब है. जबकि, राज्य सरकार का कहना है कि जब सेल की इकाई का निर्माण हो रहा था, तब उसे जमीन बहुत कम दर पर उपलब्ध कराया गया था. इसके कारण वर्तमान बाजार दर पर जमीन देना न्यायसम्मत नहीं है. कीमत पर सहमति नहीं बनने के कारण जमीन ट्रांसफर का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. विवाद बढ़ने पर सरकार के निर्देश पर भू-अर्जन निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी बनायी गयी थी. कमेटी में सेल प्रतिनिधि के अलावा जियाडा एमडी, बोकारो डीसी, अपर समाहर्ता व डीएफओ शामिल थे. फरवरी 2026 में सेल परिसर की 746 एकड़ जमीन का मूल्य कमेटी ने यह कहते हुए तय किया कि सेल परिसर की जमीन वर्षों से बिकी नहीं है. पास के रानी पोखर क्षेत्र में जमीन 13,600 रुपए प्रति डिसमिल के सर्किल रेट पर बिक चुकी है. औद्योगिक उपयोग के लिए उसी आधार पर जमीन का मूल्य तय किया जा सकता है.

24 मार्च को सदन में केंद्रीय मंत्री ने दी थी जानकारी

कॉरिडोर मसले को लेकर धनबाद सांसद ढुलू महतो ने लोकसभा में सवाल उठाया था. 24 मार्च 2026 को पूछा गया था कि क्या अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के अंतर्गत बोकारो जिला में भूमि आवंटन के लिए कोई औपचारिक अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है? इस पर केंद्रीय उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जवाब दिया कि बोकारो जिला में उपयुक्त भूमि की उपलब्धता की पुष्टि झारखंड सरकार द्वारा अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के हिस्से के रूप में विकास के लिए अभी तक नहीं की गयी है.

योजना धरातल पर उतरी, तो क्या होगा फायदा

इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रमुख आर्थिक केंद्र को सड़क, रेलमार्ग, बंदरगाह व हवाई अड्डा के एकीकृत नेटवर्क से जोड़ता है. उद्योग व मूलभूत अवसंरचना के बीच संपर्क को सुदृढ़ कर तीव्र औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देता है. बोकारो में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के बनने से हर तरह की व्यापारिक सुगमता मिलेगी. प्रतिस्पर्धी व व्यवसाय-अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए निर्धारित मार्ग पर विश्व स्तर की अवसंरचना का विकास होगा.

डीसी ने कहा

बोकारो डीसी अजयनाथ झा ने कहा कि जमीन को लेकर राज्य सरकार की ओर से जमीन की दर का निर्धारण सर्किल रेट के आधार किया गया है. अब सेल व एनआइसीडीसी को इस मामले में फैसला लेना है. यदि जमीन महंगी मिलेगी, तो योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पायेगा. राज्य की ओर से जिस दर पर जमीन उपलब्ध कराया गया है या कराया जाता है, उसी दर पर सेल को जमीन देनी चाहिए. इस मसले पर जितना जल्दी फैसला होगा, काम उसी रफ्तार से आगे बढ़ेगी.

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