बोकारो में हाथियों के लिए बनेगा आधुनिक ट्रांजिट-ट्रीटमेंट सेंटर, विशेष ट्रक और मेडिकल वैन से होगा बचाव

झारखंड के बोकारो में हाथियों के लिए विशेष ट्रांजिट और उपचार केंद्र बनेगा. वन विभाग ने मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए यह बड़ी योजना तैयार की है.

बोकारो. झारखंड में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को देखते हुए बोकारो में हाथियों के लिए विशेष एलीफेंट ट्रांजिट एंड ट्रीटमेंट सेंटर विकसित किया जायेगा. वन विभाग ने इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. योजना, डिजाइन, लागत अनुमान और परियोजना की निगरानी के लिए विशेषज्ञ संस्था की तलाश की जा रही है.

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वन विभाग की योजना के अनुसार रांची, हजारीबाग और रामगढ़ में भी हाथी बचाव एवं रिस्पांस सेंटर विकसित किये जायेंगे. इन केंद्रों के जरिये घायल, बीमार और संकट में फंसे हाथियों के रेस्क्यू और उपचार को बेहतर बनाने की तैयारी है.

हाथी गलियारों पर बढ़ रहा दबाव

बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग और आसपास के इलाके हाथियों के पारंपरिक आवागमन वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. इन इलाकों में खुले में कोयला खनन, रेलवे लाइन और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों के कारण जंगलों और हाथी गलियारों पर दबाव बढ़ा है.

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वन अधिकारियों के अनुसार, वन क्षेत्रों के बीच संपर्क कम होने से हाथियों के पारंपरिक आवागमन में बाधा आ रही है. ऐसे में कई बार हाथी आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

घायल और आक्रामक हाथियों के इलाज में मिलेगी मदद

बोकारो में प्रस्तावित केंद्र में घायल, बीमार, अनाथ या आक्रामक हाथियों को कुछ समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा. यहां हाथियों के इलाज और रेस्क्यू के साथ जरूरत पड़ने पर पुनर्वास की व्यवस्था भी की जायेगी.

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केंद्र के माध्यम से हाथियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने और उपचार के बाद जंगल में वापस छोड़ने की व्यवस्था की जायेगी. डॉक्टर, पैरावेट और अन्य कर्मचारियों के रहने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जायेंगी.

भविष्य में हाथी कैंप के रूप में विकसित करने की तैयारी

चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन रवि रंजन के अनुसार, केंद्र को भविष्य में हाथी कैंप के रूप में विकसित किया जा सकता है. इसके लिए आगे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से लाइसेंस लेने की भी योजना है.

केंद्र में हाथियों के लिए होल्डिंग क्षेत्र, भोजन भंडारण, वाहन पार्किंग और कर्मचारियों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जायेंगी. जरूरत पड़ने पर हाथियों को उपचार के बाद जंगल में सुरक्षित तरीके से छोड़ने के लिए सॉफ्ट रिलीज की व्यवस्था भी की जायेगी.

विशेष रेस्क्यू ट्रक में होंगी आधुनिक सुविधाएं

हाथियों को बचाने और एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुरक्षित ले जाने के लिए विशेष रेस्क्यू ट्रक तैयार किया जायेगा. इसमें वेंटिलेशन स्लॉट, पैर बांधने की व्यवस्था और छह से आठ टन क्षमता का हाइड्रोलिक लिफ्टिंग सिस्टम होगा.

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ट्रक में धूप से बचाव के लिए फोल्डेबल पर्दे और झटकों से बचाने के लिए एयर कुशन की व्यवस्था रहेगी. इसके अलावा सीसीटीवी और तापमान की निगरानी की सुविधा भी उपलब्ध होगी.

पशु चिकित्सा वैन भी होगी तैयार

हाथियों के उपचार और रेस्क्यू के दौरान मौके पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए महिंद्रा बोलेरो चेसिस पर विशेष पशु चिकित्सा वैन तैयार की जायेगी. इसमें पानी की टंकी, दवाओं के लिए कैबिनेट, रेफ्रिजरेटर, सिंक और स्ट्रेचर जैसी सुविधाएं होंगी.

वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति में त्वरित रेस्क्यू, बेहतर उपचार और हाथियों को सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना है.

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By Manoj kumar singh

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