बोकारो भाजपा में बगावत, निकाय चुनाव में कई बागियों ने ठोकी ताल

Jharkhand Civic Polls: बोकारो के चास नगर निगम चुनाव में भाजपा के भीतर बगावत खुलकर सामने आई है. पार्टी समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ चार नेताओं ने नामांकन दाखिल किया है. गैर दलीय चुनाव में संगठन की कलह भाजपा के लिए चुनौती बनती दिख रही है. नेतृत्व बागियों को मनाने में जुटा है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

बोकारो से सीपी सिंह की रिपोर्ट

Jharkhand Civic Polls: कहने को झारखंड में नगर निकाय चुनाव गैर दलीय आधार पर हो रहा है. लेकिन, हकीकत यह है कि चुनावी मैदान में उतर रहे उम्मीदवारों की पहचान पूरी तरह राजनीतिक दलों से जुड़ी हुई है. इसी गैर दलीय चुनाव में अब दलों के भीतर बगावत भी खुलकर सामने आने लगी है. बोकारो जिले के चास नगर निगम चुनाव में भाजपा के भीतर उभरी बगावत ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है.

चास नगर निगम में भाजपा के चार बागी मैदान में

चास नगर निगम के मेयर पद के लिए भाजपा ने अविनाश कुमार को अपना समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है. पार्टी के इस फैसले के बाद कई नेताओं ने अनुशासन का पालन करते हुए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और नामांकन यात्रा में भी शामिल हुए. लेकिन, इसके बावजूद भाजपा के चार नेताओं ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर नामांकन दाखिल कर दिया. इन बागी उम्मीदवारों में डॉ परिंदा सिंह, ऋतुरानी सिंह, अरविंद राय और डॉ विकास पांडेय शामिल हैं. इन सभी ने प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशों को भी नजरअंदाज कर सीधे चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है.

नामांकन में दिखी संगठन की दरार

भाजपा खुद को अनुशासन और सिद्धांतों की पार्टी बताती रही है. लेकिन चास नगर निगम चुनाव में यह दावा कमजोर पड़ता दिख रहा है. बागी उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान जिस तरह से पार्टी के पुराने नेता और कार्यकर्ता नजर आए, उसने संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. डॉ विकास पांडेय के नामांकन में भाजपा के कई वरीय नेता मौजूद रहे. वहीं धनबाद सांसद के प्रतिनिधि अरविंद राय के नामांकन में भी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता खुलकर सामने आए. डॉ परिंदा सिंह और ऋतुरानी सिंह के नामांकन के दौरान भी भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी दर्ज की गई.

नेतृत्व की अपील बेअसर

प्रदेश और जिला स्तर के नेतृत्व ने समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में एकजुट रहने की अपील की थी. इसके बावजूद बागियों का मैदान में डटे रहना यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर असंतोष गहराया हुआ है. कई नेता खुद को मजबूत दावेदार मानते हुए पार्टी के फैसले से असहमत दिखे और चुनाव लड़ने पर अड़े रहे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गैर दलीय चुनाव होने के कारण बागी उम्मीदवारों को यह उम्मीद है कि पार्टी कार्रवाई का असर सीमित रहेगा. इसी वजह से वे खुलकर चुनौती दे रहे हैं.

जिलाध्यक्ष बोले, सभी से होगी बातचीत

भाजपा जिलाध्यक्ष जयदेव राय ने बगावत के सवाल पर कहा कि सभी उम्मीदवारों से बातचीत की जाएगी. पार्टी स्तर से नामांकन वापस लेने को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि सभी बागी उम्मीदवार नामांकन वापस ले लेंगे. जयदेव राय ने साफ कहा कि अगर कोई उम्मीदवार नामांकन वापस नहीं लेता है, तो पार्टी आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी. संगठन किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं करेगा.

2015 का अनुभव कर रहा है परेशान

भाजपा के लिए चिंता की एक बड़ी वजह 2015 का नगर निकाय चुनाव भी है. उस चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी सातवें स्थान पर रहा था. उस समय भी बगावत हुई थी. हालांकि पार्टी ने अंतिम समय में बागियों को मना लिया था, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था. इस बार भी वही स्थिति दोहराने का खतरा मंडरा रहा है. यदि समय रहते बागियों को नहीं मनाया गया, तो इसका सीधा फायदा विपक्षी उम्मीदवारों को मिल सकता है.

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चुनावी नतीजों पर पड़ेगा असर

चास नगर निगम चुनाव में भाजपा की यह अंदरूनी कलह अब चुनावी मुद्दा बनती जा रही है. सवाल यह है कि पार्टी नेतृत्व समय रहते संगठन को एकजुट कर पाएगा या फिर बगावत भाजपा की राह मुश्किल कर देगी. इसका जवाब अब मतदाता और चुनाव परिणाम ही देंगे.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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